आज पूरे देश में 67वां गणतंत्र दिवस धूमधाम से
मनाया जा रहा है। इस मौके पर राजपथ पर भारत की ताकत दिखाई गई । भारत की सैन्य
शक्ति और विभिन्न क्षेत्रों में उसकी उपलब्धियां, अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली, सांस्कृतिक विविधता, सामाजिक परंपराएं, आत्म-निर्भरता और स्वदेशीकरण
पर सरकार का जोर, इन सभी की झलक 67वें गणतंत्र दिवस समारोह में परेड के दौरान आज
राजपथ पर नजर आई । इस मौके पर फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद मुख्य अतिथि
हैं।
गणतंत्र दिवस समारोह के इतिहास
में पहली बार फ्रांस की सेना का 76 सदस्यीय दल भी राजपथ पर भारत के राष्ट्रपति को
सलामी दिया। इस दल में 48 संगीतकारों का दस्ता भी शामिल हुआ। परेड में 26 साल के बाद सेना के श्वान
(कुत्ता) दस्ते के सदस्य भी अपने हैंडलर्स के साथ भाग लिया। परंपराओं के अनुसार, राजपथ पर बीएसएफ के उंट दस्ते
के सजे-धजे रंग-बिरंगे 56 उंटों का दस्ता डिप्टी कमांडेंट कुलदीप जे. चौधरी
के नेतृत्व में मार्च किया।
राजपथ पर संस्कृति और देश के
उज्ज्वल भविष्य की झलक भी दिखाई गई। इस बार की झांकी में पंचायती राज की झांकी को शामिल किया गया। वही स्वच्छ भारत अभियान की झांकी
दिखाई गयी। गोवा की झांकी में यहां की
जागोर जनजाति और गुजरात की झांकी में गौरव की पहचान गीर के जंगल दिखाए गए। सिक्किम
की झांकी में सागा दाबा यानी बुद्ध जयंती उत्सव को पेश किया गया। जम्मू-कश्मीर की
झांकी में मेरा गांव मेरा जहां यानी स्वच्छ एवं हरित अभियान का प्रचार किया गया। राजस्थान की झांकी में जयपुर के गौरव हवा महल को दिखाया गया। हवा महल को 1799 में सवाई प्रताप सिंह ने
बनवाया था। चंडीगढ़ की झांकी में सपनों के शहर में खुला स्वागत करते दिखाया गया।
ओडिशा की झांकी में बंदाण महोत्सव दिखाया गया। बिहार की झांकी में चंपारण
सत्याग्रह को दिखाया गया।
कर्नाटक की झांकी में कॉफ़ी की
धरती कोडगु को दिखाया गया। छत्तीसगढ़ की झांकी में खैरागढ़ कला एवं संगीत
विश्वविद्यालय को दिखाया गया। तमिलनाडु की झांकी में थोडा जनजाति की झलक दिखाई गई।
उत्तराखंड की झांकी में रम्माण उत्सव की झलक दिखी। उत्तर प्रदेश की झांकी में
जरदोई कला प्रदर्शित की गई। असम की झांकी में रोंगाली बीहू की झलक पेश की गई।






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