एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफार्म की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक राजौरी गार्डन से कांग्रेस की उम्मीदवार धनवंती चंदीला की संपत्ति 55 करोड़ की है। लेकिन ये इनकम टैक्स नहीं भरती हैं।
ओखला से कांग्रेस के ही उम्मीदवार आसिफ मोहम्मद खान की आयकर रिर्टन भरने में दिलचस्पी नहीं दिखाते। इनकी संपत्ति 13 करोड़ की है।
इसके अलावा घोंडा सीट से आप उम्मीदवार दाताराम की संपत्ति 4 करोड़ की है ये भी इनकम टैक्स भरने से कतराते हैं।
2013 के विधानसभा चुनावों में सबसे अमीर उम्मीदवार शिरोमणी अकाली दल के मनजिंदर सिंह सिरसा हैं। सिरसा के पास करीब 235 करोड़ की संपत्ति है और ये राजौरी गार्डन विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
अमीरों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर मोती नगर विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार सुनील गुप्ता हैं। इनके पास 164 करोड़ रुपये की संपत्ति है।
143 करोड़ की संपत्ति के साथ दिल्ली कैंट से कांग्रेस उम्मीदवार अशोक कुमार जैन अमीरी के मामले में तीसरे पायदान पर हैं।
वही अमीरों के अलावा सबसें गरीबों की लिस्ट भी है जिसमें राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के आलम खान ने अपनी संपत्ति शून्य बताई है। आलम खान मुंडका सीट से चुनाव लड़ रहें हैं।
कोंडली विधानसभा सीट से सीपीआई–एमएल के कोंडली सीट से उम्मीदवार रामरूप 2000 रुपये की संपत्ति के साथ गरीबी की लिस्ट में दूसरे नम्बर पर हैं।
जबकि वजीरपुर से सीपीआई–एमएल के ही उम्मीदवार मन्नू कुमार की संपत्ति 3 हजार रूपये है और वो गरीब उम्मीदवारों की लिस्ट में तीसरे नम्बर पर है।
गरीबी अपनी जगह पर कायम हैं और पिछले 5 साल में कई नेताओं ने अपनी इनकम हजारों फीसदी बढ़ाई है। इनमें सबसे पहला नाम बिजवासन विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक सत प्रकाश का है। सत प्रकाश ने पिछले पांच सालों में 1652 फीसदी संपत्ति का इजाफा किया है।
वहीं इस बार दिल्ली में हर राजनीतिक पार्टी आंकड़ों के हिसाब से ना महिलाओं को ज्यादा मौका मिला है और ना ही पढ़े लिखे उम्मीदवारों पर दिलचस्पी दिखाई गई है।
एसोसिएशन आफ डेमोक्रेटिक रिफार्म की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक इस बार विधानसभा चुनाव में 60 फीसदी ऐसे उम्मीदवार हैं जो ग्रैजुएट भी हैं। 796 में से 185 उम्मीदवार 10 वीं या उससे कम पढ़े लिखे हैं। 22 उम्मीदवार तो ऐसे भी है जो पूरी तरह से अनपढ़ हैं जिनमें से दो बीजेपी के प्रत्याशी हैं। चुनावी मैदान में 10 पीएचडी होल्डर भी है जिनमें से 4 बीजेपी 4 कांग्रेस और 2 आप के उम्मीदवार हैं।
दिल्ली चुनाव में 332 उम्मीदवार 40 साल से कम उम्रम के है। हालांकि सबसे ज्यादा उम्मीदवारों की औसत उम्र 40 से 50 के बीच है। 70 से 80 साल तक की उम्र वाले करीब 20 उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में हैं।
वही महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ाने की बातें हर राजनीतिक दल की तरफ से खूब होती हैं। लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव में कुल 796 उम्मीदवारों में से महिला उम्मीदवार 69 हैं। कांग्रेस और आप ने 6-6 जबकि बीजेपी ने सिर्फ 5 महिला उम्मीदवारों को ही मौका दिया है।
दिल्ली चुनाव में बहुबली उम्मीदवारों को पूरा बोलबाला है। 796 मे से 129 यानि करीब 16 फीसदी उम्मीदवार ऐसे हैं। जिन्होंने अपने उपर आपराधिक मामलों का ब्यौरा दिया है। दागी उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा 31 उम्मीदवार बीजेपी के है। कांग्रेस के 15, बीएसपी के 14, और आम आदमी पार्टी के भी 5 उम्मीदवार दागी हैं। ये आंकड़े बताते है कि सत्ता पाने के लिए सियासी दलों ने क्या-क्या किया है। इससे साफ है कि राजनीतिक दलों ने भी सिर्फ उन उम्मीदवारों को तरजीह दी है जिनके पास दौलत ज्यादा है। ऐसे में लोकतंत्र के क्या मायने निकाले जाएं इसका फैसला आप खुद कर लीजिए?
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