शब्दों की यात्रा में, शब्दों के अनगिनत यात्री मिलते हैं, शब्दों के आदान प्रदान से भावनाओं का अनजाना रिश्ता बनता है - गर शब्दों के असली मोती भावनाओं की आँच से तपे हैं तो यकीनन गुलमर्ग यहीं है...सिहरते मन को शब्दों से तुम सजाओ, हम भी सजाएँ, यात्रा को सार्थक करें....
मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...
जन्म के बाद मृत्यु
तो निःसंदेह मृत्यु के बाद जन्म
कब कहाँ जन्म
और कहाँ मृत्यु
सबकुछ अनिश्चित … !
कल्पना का अनंत छोर
जीने का प्रबल संबल देता है
साथ ही
मृत्यु की भी चाह देता है
चाह निश्चित हो सकती है
हो भी जाती है
पर परिणाम सर्वथा अनिश्चित
!!!
प्रयास के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं !!!
……………………
चलो एक प्रयास हम कल्पना से परे करें
मृत्यु के बाद का सत्य जानें
यज्ञ करें
विज्ञान की ऊँगली थाम आविष्कार करें
मृत शरीर की गई साँसों की दिशा लक्ष्य करें
सूक्ष्म ध्वनिभेद पर केन्द्रित कर सर्वांग को
…आत्मा में ध्यान की अग्नि जला
असत्य की आहुति दे
उस सूक्ष्मता को उजागर करें
…।
पाप-पुण्य की रेखा से परे
ईश्वरीय रहस्य को जाग्रत करना होगा
एक युग
एक महाकाव्य
एक महाग्रंथ का निर्माण करना होगा
जन्म-मृत्यु
इन दोनों किनारों को आमने-सामने करना होगा
संगम में मुक्ति है
तो उसी संगम में ढूंढना होगा
प्रेम का तर्पण
त्याग का तर्पण
मोह का तर्पण
प्रतिस्पर्धा का तर्पण
कुछ यूँ करना होगा
मृत्यु के पार सशरीर जाकर
आत्मा से रूबरू होना होगा
मेरे एहसास इस मंदिर मे अंकित हैं...जीवन के हर सत्य को मैंने इसमे स्थापित करने की कोशिश की है। जब भी आपके एहसास दम तोड़ने लगे तो मेरे इस मंदिर मे आपके एहसासों को जीवन मिले, यही मेरा अथक प्रयास है...मेरी कामयाबी आपकी आलोचना समालोचना मे ही निहित है...आपके हर सुझाव, मेरा मार्ग दर्शन करेंगे...इसलिए इस मंदिर मे आकर जो भी कहना आप उचित समझें, कहें...ताकि मेरे शब्दों को नए आयाम, नए अर्थ मिल सकें ...
जन्म के बाद मृत्यु
तो निःसंदेह मृत्यु के बाद जन्म
कब कहाँ जन्म
और कहाँ मृत्यु
सबकुछ अनिश्चित … !
कल्पना का अनंत छोर
जीने का प्रबल संबल देता है
साथ ही
मृत्यु की भी चाह देता है
चाह निश्चित हो सकती है
हो भी जाती है
पर परिणाम सर्वथा अनिश्चित
!!!
प्रयास के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं !!!
……………………
चलो एक प्रयास हम कल्पना से परे करें
मृत्यु के बाद का सत्य जानें
यज्ञ करें
विज्ञान की ऊँगली थाम आविष्कार करें
मृत शरीर की गई साँसों की दिशा लक्ष्य करें
सूक्ष्म ध्वनिभेद पर केन्द्रित कर सर्वांग को
…आत्मा में ध्यान की अग्नि जला
असत्य की आहुति दे
उस सूक्ष्मता को उजागर करें
…।
पाप-पुण्य की रेखा से परे
ईश्वरीय रहस्य को जाग्रत करना होगा
एक युग
एक महाकाव्य
एक महाग्रंथ का निर्माण करना होगा
जन्म-मृत्यु
इन दोनों किनारों को आमने-सामने करना होगा
संगम में मुक्ति है
तो उसी संगम में ढूंढना होगा
प्रेम का तर्पण
त्याग का तर्पण
मोह का तर्पण
प्रतिस्पर्धा का तर्पण
कुछ यूँ करना होगा
मृत्यु के पार सशरीर जाकर
आत्मा से रूबरू होना होगा
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