Wednesday, 20 August 2014

चौराहे पर खड़ी पाकिस्तानी सियासत

विजय कुमार राय(टीवी पत्रकार)
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में सियासी संकट गहराता जा रहा है.... इमरान खान और मौलाना ताहिर उल कादरी के 25,000 से ज्यादा समर्थक...प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के इस्तीफा देने की मांग पर अड़े हैं... प्रदर्शनकारी पाकिस्तान की संसद और प्रांतीय असेंबलियों को भंग किए जाने की मांग पर अड़े हैं। वहीं, लाहौर की एक अदालत ने नवाज शरीफ, उनके भाई शाहबाज शरीफ और 19 अन्य लोगों के खिलाफ हत्या का आरोप दर्ज करने का आदेश दिया है... इस वजह से 15 महीने पुरानी नवाज शरीफ सरकार के सामने अब तक का सबसे बड़ा संकट पैदा हो गया है...चलिए आपको भी दिखाते हैं पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में इस वक्त क्या हालात हैं।
35 घंटों का सफ़र
300 किलोमीटर की दूरी
25 हजार लोगों की यात्रा
मांग सिर्फ एक
'जाओ नवाज जाओ'
जी हां ये हाल है सीमा से सटे...पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान का... पाकिस्तान में सियासी संकट इस कदर गहरा गया है...कि वहां कभी भी तख्ता पलट हो सकता है... 15 महीने पुरानी नवाज शरीफ की सत्ता का किला...किसी भी वक्त धवस्त हो सकता है। देशभर में नवाज शरीफ की खिलाफ़त का दौर जारी है...नवाज शरीफ के खिलाफ छिड़ी जंग अब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद तक भी पहुंच चुकी है। 25000 प्रदर्शनकारी लाहौर से 35 घंटे में 300 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय कर यहां पहुंचे हैं.... प्रदर्शनकारियों की जुबां पर सिर्फ एक ही नारा है... 'जाओ नवाज जाओ' .... मतलब साफ है कि आवाम अब नवाज को बर्दाश्त करने के कतई मूड में नहीं हैं। हालात को भांपते हुए पाकिस्तान सरकार ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए... इस्लामाबाद में हजारों पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया है...लेकिन वक्त के साथ-साथ हालात और भी बदतर होते जा रहे हैं।
नवाज़ शरीफ़ के खिलाफ़
एकजुट हुए कादरी-इमरान
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेता इमरान खान ने यहां पहुंचने के बाद समर्थकों से कहा, 'अब वक्त आ गया है कि मुल्क फैसला करे। मैं यहां तब तक रहूंगा जब तक प्रधानमंत्री इस्तीफा नहीं दे देते। हम उस प्रधानमंत्री को कुबूल नहीं कर सकते जो धांधली वाले चुनाव के बाद बना है। हम चुनावों में धांधली के खिलाफ चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट गए। जब हमें इंसाफ नहीं मिला तब हमने फैसला किया कि अब सड़क पर उतरने के सिवाय हमारे पास कोई दूसरा चारा नहीं है।'इतना ही नहीं तहरीक-ए-इंसाफ के प्रदर्शन स्थल से कुछ दूरी पर... कादरी और उनकी पार्टी पाकिस्तान अवामी तहरीक के समर्थक में डेरा डाले हैं.

पाकिस्तानी मूल के कनाडावासी कादरी का आरोप है कि.... बीते 17 जून को पुलिस के साथ झड़प में उनके 14 समर्थकों की मौत हुई थी... इस मामले में कादरी ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ को गिरफ्तार करने की मांग की है... कादरी ने कहा, 'मैं तब तक नहीं जाउंगा जब तक नवाज और शाहबाज गिरफ्तार नहीं हो जाते।'


हालांकि, पाकिस्तानी पीएमओ ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों की ये
 मांग एकदम बेतुकी है.... शरीफ ने सरकार पर किसी तरह का खतरा मंडराने से इनकार किया है... उनकी सरकार के मंत्रियों ने कहा कि शरीफ के इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता..... सरकार ने प्रदर्शकारियों और रैली में कोई बाधा नहीं डाली, लेकिन राजधानी में 'रेड जोन' में प्रदर्शनकारियों के प्रवेश को रोकने के लिए सड़कों पर कंटेनर्स रखकर पूरे इलाके की नाकेबंदी कर दी गई है। बावजूद इसके प्रदर्शनकारी रेड जोन में दाखिल हो चुके हैं। यही नहीं नवाज शरीफ को इस्तीफ के लिए प्रदर्शनकारियों ने बुधवार शाम 7 बजे तक का अल्टीमेटम दिया है।
पाकिस्तान में एक तरफ नवाज सरकार है...तो दूसरी तरफ सरकार की खिलाफत पर उतरा आवाम है... हालात देखकर एक बार फिर पाक की पुरानी यादें ताजा होने लगती हैं... जिनमें जम्मूरिहत के नाम पर...सत्ता बदलती रही...और सत्ता के सिंघासन पर बैठने वालों को सज़ा-ए-मौत तक मिलती रही। एक बार फिर पाकिस्तान में सरकार के खिलाफ जंग छिड़ी है...देखना होगा कि ये ऊंट किस करवट बैठता है। 
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा... कि देश में जारी राजनीतिक संकट का समाधान सरकार को करना चाहिए। अदालत ने इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करने का फैसला लिया। जाहिर है इस फैसले के बाद नवाज़ शरीफ़ को थोड़ी राहत ज़रूर महससू हुई होगी...लेकिन लाहौर की अदालत ने नवाज़ शरीफ के खिलाफ मुकदमें के आदेश देकर...उन्हें दोबारा मुश्किल में डाल दिया है...मुकदमे की ये गाज सिर्फ नवाज पर ही नहीं बल्कि उनके भाई-भतीजे समेत.. उनके 21 करीबियों पर भी गिरी है।
 एक तरफ पाकिस्तान में सियासी संकट गहराता जा रहा है..तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के पीएम नवाज़ शरीफ... अदालतों के फेर में फंसते नज़र आ रहे हैं.. कहीं से उन्हें राहत मिल रही है..तो कहीं अदालत के आदेश उनके लिए आफत बने हुए हैं। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक संकट और बुनियादी अधिकारों के कथित उल्लंघन को लेकर.... सरकार और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पीटीआई के बीच गतिरोध का समाधान तलाशना सरकार का काम है। पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश नसीर-उल-मुल्क की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने... राजधानी इस्लामाबाद में चल रहे धरना के बारे में कहा कि "इससे निपटना सरकार का काम है।" जाहिर है अदालत के इस फैसले से पाक पीएम को थोड़ी राहत जरूर मिली होगी..इस फैसले के बाद... उन्हें एक बार फिर इस बात का एहसास जरूर हुआ होगा कि अभी भी उनके हाथों में ताकत है।  लेकिन नवाज़ की ये राहत उस वक्त आफत बन गई..जब लाहौर की एक अदागत ने उन्हें तगड़ा झटका दिया।
चौतरफा घिरे नवाज़ शरीफ़
शरीफ़ पर हत्या का आरोप
 लौहार की अदालत ने दिए
पीएम के खिलाफ मुकदमे के आदेश
 परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
भाई-भतीजे पर भी आरोप दर्ज
पाकिस्तान में लाहौर की एक अदालत ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, उनके भाई और पंजाब के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ और 19 अन्य लोगों के खिलाफ हत्या का आरोप दर्ज करने का आदेश दिया है। गौरतलब है कि पाकिस्तान अवामी तहरीक यानी पीएटी प्रमुख के मुख्यालय के पास से अवरोधक हटाने की अधिकारियों की कोशिश के बाद 17 जून को पुलिस के साथ झड़प में दो महिलाओं समेत पीएटी के 14 समर्थकों की मौत हुई थी....औऱ इस झड़प में 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

मॉडल टाउन झड़प से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही लाहौर सेशन कोर्ट ने पुलिस से... उन 21 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने को कहा है... जिन्हें पीएटी ने अपनी शिकायत में नामजद कराया था.... कोर्ट ने पुलिस को पाक पीएम नवाज़ शरीफ, उनके भाई शहबाज, उनके भतीजे हमजा शाहबाज, गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान और अन्य के खिलाफ हत्या का...  मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
जाहिर है इस मामले में नवाज़ शरीफ की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। देखना ये होगा कि इन गंभीर हालातों से निपटने के लिए शरीफ सरकार क्या कदम उठाती है।
 क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान का आरोप है कि नवाज़ शरीफ 2013 में...चुनावी मैच फिक्सिंग में शामिल रहे हैं। लिहाजा वो ऐसे प्रधानमंत्री को कतई स्वीकार नहीं करेंगे...गौरतलब है कि 2013 के आमचुनाव में शरीफ ने 342 में से 190 सीट हासिल की थी। खान की पार्टी को 34 सीटें मिली थीं और वह तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। इमरान खान ने दावा किया है कि अगर चुनाव में शरीफ फ्किसिंग नहीं करते...तो उनकी पार्टी को कई और सीटें मिल सकती थीं। इसी आरोप को लेकर पाकिस्तान में जंग छिड़ गई है। चलिए आपको दिखाते हैं कि इस जंग का भारत पर क्या असर पड़ सकता है।
पाकिस्तान में संकट
भारत पर असर

ये बात तय है कि पाकिस्तान में सियासी हालात बिगड़ने का फायदा पाकिस्तानी फौज और वहां के आतंकी संगठन जरूर उठाएंगे। लिहाजा अब वक्त आ चुका है कि भारतीय सेनाओं को भी कमर कस लेनी चाहिए... आने वाले कुछ महीनों में सर्दियां शुरू होने वाली हैं... अक्सर देखा गया है कि सर्दियों में घुसपैठ की घटनाएं...तेज हो जाती हैं..लिहाजा बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स यानी बीएसएफ को सीमा से सटे इलाकों में पैनी नज़र रखने की जरूरत है... यही नहीं जम्मू कश्मीर में आगामी चुनावों को देखते हुए... जम्मू-कश्मीर पर खास ध्यान देने की भी जरूरत है। विदेश सचिव स्तर की वार्ता रद्द होना... पाकिस्तान के आतंकी संगठनों के लिए राहत की बात है.. इसलिए आतंकी गतिविधियों के बढ़ने से पहले.... हमें सतर्क रहना होगा।
पाक के बिगड़े हालात में
अमेरिका की भूमिका
पाक सेना इमरान खान के जरिए अमेरिका पर दबाव बनाना चाहती है... क्योंकि वो ड्रोन हमलों के सख्त खिलाफ रहे हैं। उधर अमेरिका भी पाकिस्तान के हालात पर पैनी नजर बनाए हुए है... खास तौर पर सेना और आईएसआई के पैंतरों पर..... क्योंकि अमेरिका भी जानता है कि पाकिस्तान के घटनाक्रम से... अमेरिका की अफगान नीति सीधे तौर पर प्रभावित होती है।

पंच "तंत्र" में उलझा पाकिस्तान

पाकिस्तान के वर्तमान हालात में पांच तत्वों की भूमिका खास है और ये ही तय करेंगे कि देश का भविष्य किस दिशा में जाएगा।
पहला तंत्र - नवाज शरीफ
पूर्ण बहुमत वाली सरकार के मुखिया लेकिन फिलहाल बुरी तरह मजबूर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का देश में कड़ा दबदबा है...लेकिन वो अपनी सेना और आईएसआई को लेकर आशंकित हैं।
दूसरा तंत्र - इमरान खान 

क्रिकेटर से नेता बने...इमरान खान बेहद महात्वाकांक्षी हैं....पाकिस्तानी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इमरान को...सरकार से ज्यादा ताकतवर फौज और खुफिया एजेंसी का समर्थन हासिल है।
तीसरा तंत्र - ताहिर उल कादरी  

ताहिर उल कादरी कहने को तो धर्मगुरू हैं लेकिन सालों से सियासत में दखलंदाजी करते रहे हैं। कनाडा और पाकिस्तान की दोहरी नागरिकता रखने वाले कादरी नवाज शरीफ के सख्त विरोधी हैं।
चौथा तंत्र - पाकिस्तानी फौज  
दुनिया जानती है पाकिस्तान में फौज की इजाजत के बिना पत्ता भी नहीं हिलता। ताजा हालात में वो खुलकर सामने नहीं आना चाहती लेकिन उसका दिल नवाज के साथ नहीं नजर आता।
पांचवां तंत्र - आईएसआई  
आईएसआई पाकिस्तान की एक बदनाम खुफिया एजेंसी है...जो सेना के साथ मिलकर नवाज को झांसा दे रही है.. आईएसआई मुशर्रफ प्रकरण में नवाज की भूमिका से बेहद खफा है। लिहाजा वो भी नवाज के सत्ता से जाने का इंतजार कर रही है।

पाकिस्तान का भविष्य इन्हीं पांच ताकतों के हाथों में है... जो भी ये तय करेंगे..वहीं होगा...लेकिन कश्मकश देखिए कि इन पांचों ताकतों में भी आपस में मतभेद हैं...यानी जिस तरफ ताकत ज्यादा होगी... पाक हुकुमत पर उसी का राज होगा।
जाहिर है कि हालात देखकर एक बार फिर पाकिस्तान की पुरानी यादें ताजा होने लगती हैं... जिनमें जम्हूरियत के नाम पर...सत्ता बदलती रही...और सत्ता के सिंघासन पर बैठने वालों को... सज़ा-ए-मौत तक मिलती रही। एक बार फिर पाकिस्तान में सरकार के खिलाफ जंग छिड़ी है...देखना होगा आगे क्या कुछ होता है

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