साल
2015 जाने को है और 2016 आने ही वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी के इस साल कुछ खास सपने रहे हैं जिन्हें उनके मंत्रिमंडल के खास 9 मंत्रियों पर उनकी इस परियोजनाओं को
परवान चढ़ाने की जिम्मेदारी है। मोदी के इन 9
मंत्रियों यानि नवरत्नों पर डिजिटल इंडिया, स्वच्छ
भारत, स्किल इंडिया जैसे मोदी के ड्रीम
प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी है।
जब हमने ये जानने की कोशिश की कि इस साल पीएम
के नवरत्नों ने क्या हासिल किया, 2016 के
लिए उनका क्या लक्ष्य है?
पीएम मोदी इन नवरत्मों में हम नितिन
गडकरी (केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री), रविशंकर
प्रसाद ( केंद्रीय टेलीकॉम मंत्री), महेश
शर्मा (केंद्रीय पर्यटन मंत्री, संस्कृति
मंत्री और उड्डयन राज्यमंत्री), राजीव
प्रताप रूडी केंद्रीय कौशल विकास मंत्री), धर्मेंद्र
प्रधान (केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री), प्रकाश
जावड़ेकर (केंद्रीय पर्यावरण मंत्री), डॉक्टर
हर्षवर्धन (केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री), राधा मोहन सिंह (केंद्रीय कृषि मंत्री)
और चौधरी बीरेंद्र सिंह (केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री, पंचायती राज मंत्री, स्वच्छता और पेयजल मंत्री) की बात
करेंगे।
ये
हैं पीएम मोदी के साल 2015 जाने को है और 2016 आने ही वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी के इस साल कुछ खास सपने रहे हैं जिन्हें उनके मंत्रिमंडल के खास 9 मंत्रियों पर उनकी इस परियोजनाओं को
परवान चढ़ाने की जिम्मेदारी है।
1. नितिन गडकरी (केंद्रीय सड़क परिवहन
मंत्री)
देश
की सड़कों पर होने वाले हादसे केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के लिए
सिरदर्द बने हुए हैं। कुर्सी संभालने के बाद नितिन गडकरी ने हर रोज 400 से ज्यादा लोगों की जान लेने वाली देश
की सड़कों को दुरुस्त करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया है। ये सड़क हादसे देश की
अर्थव्यवस्था को भी जबरदस्त नुकसान पहुंचाते हैं।
गडकरी
का मकसद है कि ट्रांसपोर्ट सिस्टम को आधुनिक बनाकर देश में सड़क हादसों को कम से कम
किया जाए। नितिन गडकरी के मुताबिक 3
लाख से ज्यादा प्रोजेक्ट अटके हुए थे। इनमें से 95 फीसदी क्लीयर कर दिए हैं। साल अंत तक 100 फीसदी अटके हुए प्रोजेक्ट क्लीयर हो
जाएंगे। जीडीपी में 2 फीसदी का सहयोग दो साल में करेंगे।
सड़क
सुरक्षा को लेकर गडकरी रोड ट्रांसपोर्ट और सेफ्टी बिल पर जोर दे रहे हैं। इस बिल
में दुनिया भर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम से अच्छी बातें शामिल की गई हैं। नए साल पर
नितिन गडकरी का लक्ष्य है भारत के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को पर्यावरण के मुताबिक
बनाएं। और वह मेट्रो सिटी में ट्रैफिक जाम से मुक्ति, पर्यावरण के लिए अच्छा काम और
इलेक्ट्रिक बस कार को बढ़ावा दे रहे हैं।
नितिन
गडकरी चाहते हैं कि देश में हाई निर्माण अगले दो साल में 30 किलोमीटर प्रति दिन की रफ्तार से होने
लगे। यूपीए शासन में ये रफ्तार सिर्फ तीन किलोमीटर प्रति दिन थी। पिछले डेढ़ साल
में इसे 13 किलोमीटर प्रति दिन तक ले आया गया है।
मंत्रालय में जो बड़े फैसले लिए गए हैं। अगर उनकी बात करें तो--
जिन
सड़कों की कीमत वसूली जा चुकी है वहां पर टोल टैक्स खत्म किया जा रहा है। अब तक
केंद्र सरकार 62 टोल प्लाजा खत्म कर चुकी है। जिन टोल
प्लाजा पर ज्यादा जाम लगता है, उन्हें
भी हटाया जा रहा है।
नेशनल
हाईवे टोल इन्फॉर्मेशन सिस्टम बनाया गया है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक टोल कनेक्शन
सिस्टम भी बनाया जा रहा है। हर टोल प्लाजा पर इंटरनेट से जुड़े CCTV कैमरे लगाए जा रहे हैं।
नितिन
गडकरी के मुताबिक देश में NH
96 हजार किलोमीटर
थे। इसे बढ़ाकर 1.5 लाख कर रहे हैं। सड़क हादसे कम करेंगे।
रोड सेफ्टी, ड्राइविंग लाइसेंस आदि को बढ़ावा देने
की दिशा में काम किया जा रहा है।
सरकार
रिवर ट्रांसपोर्ट पर भी खासा ध्यान दे रही है। मकसद ये कि नदी के रास्ते कारोबारी
अपना सामान बांग्लादेश तक ले जा सकें। इसके लिए तीन रूट डवलप किए जा रहे हैं।
जनवरी में टेंडर निकाल रहे हैं। वॉटर पोर्ट बनाएंगे।
लक्ष्य
मुश्किल भले हो लेकिन नामुमकिन नहीं। ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर रजिस्ट्रेशन तक
में गडकरी एक क्रांति लाना चाहते हैं। देशभर में हादसों की जानकारी देने के लिए
टोलफ्री नंबर 1033 की शुरुआत की जा रही है। अब देखना ये
है कि साल 2016 में उनके किए कितने वायदे पूरे होते
हैं।
2. रविशंकर प्रसाद (केंद्रीय टेलीकॉम
मंत्री)
पीएम
के ड्रीम प्रोजेक्ट डिजिटल इंडिया की कमान रविशंकर प्रसाद के ही हाथों में है।
टेलीकॉम मंत्री बने 19 महीने बीत रहे हैं। आईबीएन 7 ने रविशंकर प्रसाद ने उनकी रिपोर्ट
कार्ड मांगी। उन बड़े कामों के बारे में पूछा जो उन्होंने साल 2015 में निपटाए हैं।
केंद्रीय
मंत्री रविशंकर प्रसाद के मुताबिक संचार भवन की छवि बदली, मंत्रालय से बिचौलियों को दूर किया।
स्पैक्ट्रम आवंटन से 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपए मिले। बीएसएनएल पहले 8 हजार करोड़ के नुकसान में था। अब 672 करोड़ के ऑपरेटिंग प्रॉफिट में है।
साल
2015 में रविशंकर प्रसाद का मंत्रालय सबसे
ज्यादा चर्चा में रहा कॉल ड्रॉप को लेकर। कॉल ड्रॉप से परेशान लोगों को राहत देने
के लिए बाकायदा आंदोलन चले। रविशंकर प्रसाद का दावा है कि उनके मंत्रालय की सख्ती
से अब कॉल ड्रॉप में काफी कमी आई है। रविशंकर प्रसाद ने बताया कि कॉलड्रॉप की
समस्या पर हमने सख्ती दिखाई। हर कंपनी को सख्त निर्देश दिए गए हैं। और इस मामले
में वोडाफोन ने माफी मांगी।
देश
में इस वक्त 98 करोड़ मोबाइल धारक हैं। जाहिर है कॉल
ड्रॉप पर सरकार की सख्ती का सीधा फायदा 98
करोड़ लोगों तक पहुंचा है। 2016 में रविशंकर प्रसाद के बड़े लक्ष्यों
में से हैं।
2016 का लक्ष्य
ढाई
लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ना। बीएसएनएल के बाद अब एमटीएनएल को
घाटे से उबारना। देश के सभी डाकघरों को डिजिटल क्रांति से जोड़ना।
रविशंकर
प्रसाद के मुताबिक सभी पोस्ट ऑफिस को हैंड हेल्ड डिवाइस से जोड़ रहे हैं। कॉल सेंटर
बना रहे हैं। गावों को तकनीकि से जोड़ने के दिशा में प्रयास जारी हैं। मेक इन
इंडिया पर भी रविशंकर प्रसाद का खासा जोर है। उनके मुताबिक टेलीकॉम क्षेत्र में
बीते साल 1 लाख 16 हजार करोड़ का विदेशी निवेश हुआ है। ये निवेश देश में डिजिटल क्रांति
को और आगे बढ़ाएगा और साथ ही उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने में भी मदद करेगा।
रविशंकर
प्रसाद ने बताया कि हमने इस साल बहुत काम किया है। 2016 में इस काम को और आगे बढ़ाएंगे। 2016 से
रविशंकर प्रसाद को बहुत उम्मीदें हैं और देश के लोगों को रविशंकर प्रसाद से।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नवरत्नों में से एक रविशंकर प्रसाद, 2016 में कितने अपने लक्ष्य तक पहुंच पाते
हैं। इसका देशभर को इंतजार है।
3. महेश शर्मा (केंंद्रीय पर्यटन मंत्री, संस्कृति मंत्री और उड्डयन
राज्यमंत्री)
महेश
शर्मा दो मंत्रालयों के कैबिनेट और एक मंत्रालय के राज्यमंत्री हैं। प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी के नवरत्नों में से एक महेश शर्मा के लिए 2015 का साल विवादों से भरा रहा। कभी दादरी
कांड, कभी स्कूलों में गीता पढ़ाने पर, कभी लड़कियों के बाहर जाने पर बयान देकर
सुर्खियों में रहे।
महेश
शर्मा के मुताबिक पर्यटन में काफी सफल हुए हैं। पहले पर्यटन की दृष्टि से 65 नंबर पर था अब 52 नंबर पर है। 25 मॉन्यूमेंट पर सुरक्षा दे रहे हैं। 115 मॉन्यूमेंट पर ई टिकटिंग दे रहे हैं।
आंकड़े
भी महेश शर्मा का साथ दे रहे हैं। उनके मंत्रालय का कमाल है कि नवंबर के महीने में
ई टूरिस्ट वीजा लेकर भारत आने वाले पर्यटकों में 2700 फीसदी का इजाफा हुआ है। जी हां, जहां
2014 में इसी महीने करीब 3 हजार टूरिस्ट आए। वहीं इस साल नवंबर
में 83 हजार से ज्यादा विदेशी टूरिस्ट ई-वीजा
लेकर आए। अब सरकार दुनिया के 113
देशों के नागरिकों को देश के 16
अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर ई टूरिस्ट वीजा दे रही है। यही नहीं, इन टूरिस्टों के लिए नई हेल्पलाइन नंबर
भी शुरू की जा रही है। महेश शर्मा ने बताया कि 1363 हेल्पलाइन नंबर शुरू कर रहे हैं, जोकि
12 भाषाओं में उपलब्ध होगी। जिससे विदेशी
लोगों को मदद मिलेगी।
संस्कृति
मंत्री के तौर पर भी महेश शर्मा देश के 34
अहम संस्थानों को एकजुट कर रहे हैं। मकसद ये कि भारत की धनी संस्कृति को पूरी
दुनिया में बढ़ावा दिया जाए। वहीं नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री के तौर पर महेश शर्मा
के मंत्रालय की एक और कामयाबी सुर्खियों में है। इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया के
विलय के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब एयर इंडिया मुनाफे में आई है। इस कमाल में एयर
इंडिया के बेड़े में आए 21 ड्रीमलाइनरों का भी बड़ा योगदान है।
केंद्रीय
मंत्री महेश शर्मा ने बताया कि एयर इंडिया ऑपरेटिंग प्रॉफिट में है। डीजीसीए को ई
डीजीसीए करने जा रहे हैं। माहौल को ट्रांसपेरेंसी, ईमानदारी, भ्रष्टाचार मुक्त बना रहे हैं।
लेकिन
उड्डयन मंत्रालय में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। वक्त की पाबंदी रखते हुए मुनाफे को
और बढ़ाना है। ऐसे में जब महेश शर्मा से पूछा 2016 में उनके लक्ष्य क्या हैं। तो
उन्होंने बताया कि विदेशी मुद्रा डेढ़ गुना करेंगे, आध्यात्मिक टूरिज्म को बढ़ावा देंगे।
महेश
शर्मा लोगों से सीधे जुड़ने वाले तीन अहम मंत्रालयों के मंत्री हैं। इसलिए उनका एक
एक फैसला लोगों पर सीधे असर करता है। 2016
में महेश शर्मा अगर अपने लक्ष्य को हासिल करते हैं तो ये विदेश में भारत की साख भी
बढ़ाएगा।
4. राजीव प्रताप रूडी (केंद्रीय कौशल
विकास मंत्री)
प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी के सबसे अहम प्रोजेक्ट कौशल विकास की जिम्मेदारी राजीव प्रताप रूडी
पर ही है। जिस देश की 54 फीसदी आबादी 25 साल से कम उम्र की हो, जिस देश की 62 फीसदी आबादी 15 से 60 साल के बीच की हो वहां अगर सिर्फ तीन फीसदी लोगों ने स्किल ट्रेनिंग
ली हो तो चिंता की बात होगी ही। ये आंकड़े इसलिए भी परेशान करने वाले हैं क्योंकि
जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में 80
फीसदी से ज्यादा लोगों स्किल ट्रेंड हैं।
राजीव
प्रताप रूडी के मुताबिक हमारा सबसे बड़ा अचीवमेंट है केंद्र और राज्य में मानक
स्थापित किया। पूरा इकोसिस्टम बना रहे हैं। सिलेबस का काम तैयार है। ब्यूटी कोर्ट, हेल्थ कुल 1600 कोर्स की हमने पहचान की है।
कौशल
विकास मंत्रालय देश के सबसे नौजवान मंत्रालयों में से भी एक है। सरकार के ज्यादातर
मंत्रालय 50 से 60 साल तक पुराने हैं। ऐसे में राजीव प्रताप रूडी के सामने चुनौती थी।
शून्य से इस मंत्रालय को खड़ा करने की। रूडी की मानें तो उनके मंत्रालय का सबसे
ज्यादा ध्यान देश के असंगठित क्षेत्र पर है।
राजीव
प्रताप रूडी ने बताया कि हमारे पास आंकड़े हैं। 50 करोड़ लोग जो खेती में हैं। असंगठित क्षेत्र में हैं। उनका कौशल विकास
करना है। अगर 10 साल की स्कूली शिक्षा के साथ 10 हफ्ते के कोर्स को जोड़ दें तो रोजगार
मिलने में आसानी होगी। हमें कम आमदनी के लोगों को कौशल प्रशिक्षित करना है।
भारत
के युवाओं का बड़ा वर्ग 2040 के बाद स्किल डवलपमेंट की उम्र को पार
कर जाएगा। ऐसे में इस नए बने मंत्रालय के पास इतने बड़े काम को पूरा करने के लिए
वक्त भी बहुत कम है। इसलिए अब 2016
में राजीव प्रताप रूडी का मंत्रालय अपनी योजना में देश के हर सांसद को जोड़ने जा
रहा है। उन्होंने आगे बताया कि देश के हर सांसद के क्षेत्र में स्किल ट्रेनिंग
सेंटर स्थापित किया जाएगा। सासंद की देखरेख में स्किल सेंटर चलेंगे।
कौशल
विकास मंत्रालय जल्द ही देश में कई कौशल यूनिवर्सिटी भी खोलने जा रहा है। मंत्रालय
राज्यों के साथ भी तालमेल बिठा रहा है। मकसद ये कि देश के उस तबके को रोजगार मिले, जो हमेशा से वंचित रहा है।
5. धर्मेंद्र प्रधान (केंद्रीय पेट्रोलियम
मंत्री)
इस
साल जनवरी में पूरे देश में लागू की गई डायरेक्टर कैश सब्सिडी योजना की बड़ी
कामयाबी का श्रेय धर्मेंद्र प्रधान को ही जाता है। इस योजना ने एलपीजी वितरण में
होने वाली धांधली को काफी हद तक खत्म कर दिया। जो लोग गैस सब्सिडी लेना चाहते हैं
उनके बैंक अकाउंट में सीधे रकम ट्रांसफर हो रही है।
धर्मेंद्र
प्रधान सबसे बड़ी जन वितरण प्रणाली को 14
करोड़ ग्राहकों तक पहुंचा पाए। इसे गिनीज बुक ने स्वीकृत किया। हाल के दिनों में
कच्चे तेल की कीमत में आई गिरावट के बाद घरेलू बाजार में भी पेट्रोल-डीजल की कीमत
कम करने की मांग उठी है।
धर्मेंद्र
प्रधान ने कहा कि पिछले डेढ़ साल में 20
बार पेट्रोल और 16 बार डीजल की कीमत कम की गई है, लेकिन राज्यों के टैक्स की वजह से इसका
फायदा जनता को नहीं मिला। धर्मेंद्र प्रधान के मुताबिक वो राजस्व बढ़ाने के साथ ही
उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। अपने मंत्रालय की पहल योजना की कामयाबी से भी
धर्मेंद्र खासे उत्साहित हैं।
धर्मेंद्र
प्रधान ने बताया कि 9 महीने में 55 लाख लोगों ने सब्सिडी छोड़ी। 46 लाख लोगों के घर तक बीपीएल कैटेगरी के
कनेक्शन दिए। दिल्ली में प्रदूषण को लेकर मचे हाहाकार के बीच धर्मेंद्र प्रधान
पेट्रोल-डीजल से होने वाले नुकसान को लेकर भी गंभीर हैं। उनका दावा है कि अप्रैल 2016 तक देशभर में BS 4 मानक लागू हो जाएगा। धर्मेंद्र प्रधान
की कोशिश है कि वो देश में 2020 तक
BS 6 मानक लागू कर पाएं।
उन्होंने
आगे बताया कि दिल्ली में प्रदूषण कम करने की कोशिश की। हम दिल्ली में हर गाड़ी में
सीएनजी सप्लाई कर सकते हैं। पेट्रोलियम मंत्री का मकसद अब देश को ईंधन सुरक्षा
देने का है। एक ऐसी सुरक्षा जिसमें देश के हर शख्स को सेहत भी मिले और सुरक्षित
ईंधन भी।
धर्मेंद्र
प्रधान के मुताबिक साल 2016-17 तक 27 करोड़ घरों में से 11-12
करोड़ लोगों तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाना है। देश में अब भी जलावन के तौर पर लकड़ी का बहुत
इस्तेमाल होता है। इसकी वजह से हर साल 5
लाख से ज्यादा महिलाओं की मौत होती है। उनकी कोशिश है कि आने वाले साल में वो इन
आंकड़ों को कम कर पाएं।
6. प्रकाश जावड़ेकर ( केंद्रीय पर्यावरण
मंत्री)
पर्यावरण
और प्रदूषण को लेकर दुनिया भर में बढ़ती चिंता के बीच देश की हवा में फैलते जहर को
कम करने की महती जिम्मेदारी है प्रकाश जावड़ेकर पर। हाल ही में पेरिस में हुई
क्लाइमेट समिट में भारत का दबदबा सभी ने देखा। IBN7 से बातचीत में प्रकाश जावड़ेकर ने 2015 के बड़े कामों में पेरिस सम्मेलन का जिक्र किया।
प्रकाश
जावड़ेकर के मुताबिक पेरिस सम्मेलन में भारत की चिंता से ही समाधान निकला है। भारत
के हित में फैसला हुआ है। उनका दावा है कि सरकार की कोशिशों के बाद अब देश में
जंगलों का दायरा घटने के बजाय बढ़ना शुरू हो गया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक 5 हजार स्कवायक किलोमीटर जंगल में इजाफा
हुआ है। अब सरकार सैटेलाइट के जरिए जंगलों पर नजर रख रही है।
जावड़ेकर
के मुताबिक सरकार औद्योगिक प्रदूषण से भी बहुत सख्ती से निपट रही है। 17 औद्योगिक सेक्टरों की पहचान की है, 2400 इंडस्ट्री हैं और 1800 की मॉनिटरिंग की जा रही है।
प्रकाश
जावड़ेकर ने अपने मोबाइल पर लगातार आने वाले मैसेज भी हमें दिखाए। अब हर 15 मिनट पर सरकार को ये जानकारी दी जाती
है कि कौन से उद्योग ने नियमों को तोड़ा। हाल के दिनों में सरकार ने प्रदूषण से
निपटने के मानकों को भी बदला है। हाल ही में अलग-अलग शहरों में प्रदूषण का स्तर
बताने वाली वेबसाइटों को भी लॉन्च किया गया है।
जावड़ेकर
के मुताबिक इससे लोगों में भी जागरूकता आ रही है। खासतौर पर देश की राजधानी में
प्रदूषण कम करने के लिए सरकार 2016
में तीन बड़े फैसले लेने जा रही है।
उनके
मुताबिक दिल्ली के लिए 3 फैसले हैं-- 1. दिल्ली में ईंधन का प्रकार बदला है। 2. वाहनों की तादाद कम कर रहे है। 3. बाईपास का निर्माण होगा। तो वहीं
केंद्र सरकार ने हर साल पंजाब और हरियाणा में जलाए जाने वाले खेतों पर भी अपना रुख
कड़ा किया है। इसी का नतीजा है कि इस साल खेत जलाने से होने वाले प्रदूषण में 30 फीसदी की कमी आई है। प्रकाश जावड़ेकर
के मुताबिक पर्यावरण में सुधार के लिए राज्यों को भी हर मुमकिन मदद की जा रही है।
7. डॉक्टर हर्षवर्धन (केंद्रीय विज्ञान और
प्रौद्योगिकी मंत्री)
पेशे
से चिकित्सक, लेकिन जिम्मेदारी देश में विज्ञान की
सेहत सुधारने की। IBN7 ने डॉक्टर हर्षवर्धन से 2015 में उनके बड़े कामों के बारे में पूछा।
डॉक्टर हर्षवर्धन की मानें तो देश में रिसर्च तो पहले भी होती थी, लेकिन अब देश की जरूरतों को ध्यान में
रखते हुए रिसर्च की दिशा तय की जा रही है।
दिसंबर
के महीने में ही उनके मंत्रालय की कमान में आईआईटी दिल्ली में हुए इंडिया
इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में दो हजार छात्रों ने प्रैक्टिकल साइंस लेशन का वर्ल्ड
रिकॉर्ड बनाया है। कोशिश ये कि छात्रों में विज्ञान के लिए रुझान बढ़ाया जाए। इसके
लिए सरकार ने शिक्षक सेतु नाम से भी योजना शुरू की है। डॉक्टर हर्षवर्धन के
मुताबिक साल 2015 में नैनो तकनीक पर रिसर्च में देश अब
तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। वैज्ञानिक रिसर्च पेपर छपने के मामले में अब भारत छठे
नंबर पर पहुंच गया है।
इसके
अलावा आधुनिक उपकरणों की मदद से उनके विभागों ने मौसम से जुड़ी 100 फीसदी सटीक भविष्यवाणियां की हैं।
सटीक अनुमान देश की अर्थव्यवस्था में भी मदद कर रहे हैं। डॉक्टर हर्षवर्धन के
मुताबिक किसानों की मदद कर रहे हैं। मछुवारों की मदद कर रहे हैं। एक लाख करोड़ रुपए
का असर पड़ेगा जीडीपी में।
देश
भर के डाटा की पड़ताल के लिए शुरू किया गया सुपर कंप्यूटिंग मिशन अब लगभग पूरा होने
को है। स्टेम सेल रिसर्च,
मलेरिया-डेंगू वैक्सीन, क्लीन कोल टेक्नॉलोजी पर उनका मंत्रालय
तेजी से काम कर रहा है। यही नहीं स्पेस टेक्नोलॉजी में भी भारत की धमक बढ़ी है।
उनके
मुताबिक पिछले एक साल में बहुत सी चीजों को नई दिशा दी। 30 मीटर टेलीस्कोप में हार्डवेयर का बड़ा
हिस्सा भारत का रहा है। विज्ञान और रिसर्च की प्रक्रिया लगातार होती है इसलिए इसे
समय सीमा में नहीं बांधा जा सकता। हां, वैज्ञानिकों
को नई तकनीक की खोज के लिए नई ऊर्जा मिलती रहे। पूरे संसाधन मिलते रहे। माहौल
मिलता रहे और पैसे की कमी ना हो, वो
इस पर 2016 में और ज्यादा जोर देंगे।
8. राधा मोहन सिंह ( केंद्रीय कृषि
मंत्री)
जिस
देश की आधी से ज्यादा आबादी खेती से जुड़ी हो, जो
दुनिया का दूसरे नंबर का सबसे बड़ा कृषि उत्पादक हो, उस देश में कृषि मंत्री के लिए चुनौतियां भी कम नहीं। कृषि विकास दर
गिरते हुए एक से 2 फीसदी के बीच अटकी हुई है। उनके
मुताबिक सबसे बड़ी उपलब्धि है कि हर खेत में पानी पहुंचाने का काम तेज हुआ है।
मार्च तक 100 जिलों का प्लान है।
बीते
एक साल में किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड दिए जाने की मुहिम भी तेज हुई है। राधा
मोहन सिंह के मुताबिक इसके लिए राज्यों की भी पूरी मदद की गई है। और अप्रैल 2016 तक देश में 5 करोड़ सॉयल हेल्थ कार्ड।
आने
वाले महीनों में कृषि मंत्रालय की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है इलेक्ट्रॉनिक
नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट। सरकार का लक्ष्य है सितंबर 2016 तक देश की 250 बड़ी मंडियों को एक साथ जोड़ दिया जाए।
ये 250 मंडियां जुड़ जाएंगी तो किसान किसी भी
मंडी में अपना अनाज बेच सकेगा और उसका मुनाफा भी बढ़ेगा।
कृषि
मंत्री का लक्ष्य देश भर में फैले 643
कृषि विज्ञान केंद्रों को और आधुनिक बनाना है। कृषि विज्ञान केंद्रों में
वैज्ञानिकों की तादाद बढ़ाई जा रही है। खेती से जुड़ी जानकारियों को किसानों तक
आसानी से पहुंचाने की भी कोशिश है।
9. चौधरी बीरेंद्र सिंह (केंद्रीय ग्रामीण
विकास मंत्री, पंचायती राज मंत्री, स्वच्छता और पेयजल मंत्री)
कुल
मुलाकर चौधरी बीरेंद्र सिंह केंद्र सरकार के कई भारी भरकम मंत्रालयों की कमान
संभाल रहे हैं। IBN7 ने चौधरी बीरेंद्र सिंह से उनके साल
भर के कामकाज का ब्यौरा मांगा। बीरेंद्र सिंह का दावा है कि उनके मंत्री बनने के
बाद उनके मंत्रालयों की जो योजनाएं चल रही थीं। अब उन्होंने तेजी पकड़ी है। अब
राज्यों को अपनी योजनाएं पूरी करने के लिए पैसा का इंतजार नहीं करना पड़ता।
चौधरी
बीरेंद्र सिंह के मुताबिक पीएम ग्रामीण सड़क योजना के तहत पहले 63 किमी रोज बनती थी। अब 100 किमी रोज बनती है। एक साल में 3000 किमी सड़क बनाई है।
2016 के लिए भी बीरेंद्र सिंह के
मंत्रालयों के पास बड़ी-बड़ी योजनाए हैं। मकसद ये कि गांव के लोगों को गांव में ही
रोजगार मिले। गांव का मूलभूत ढांचा बनाएंगे, 24
घंटे बिजली देंगे। पानी हो,
सड़क से जुड़े होंगे गांव, एटीएम हो, स्कूल हो आदि कार्य उनकी प्रमुखता में
होंगे।
उनका
जोर देश के हर गांव में लोगों को पक्की छत देने का है। इंदिरा आवास योजना के तहत
जहां पहले 70 हजार रुपए की मदद की जाती थी। अब इस
मदद को दोगुने से भी ज्यादा कर दिया गया है। पहले 20 वर्ग मीटर का घर था। अब 25
वर्ग मीटर का घर है। हम घर देने की कोशिश कर रहे हैं।
बीरेंद्र
सिंह की मानें तो गांवों में बनने वाले ये घर कम से कम 40 साल तक चलेंगे, जबकि पहले जो घर बनाए जाते थे उनकी
उम्र इतनी नहीं होती थी। बीरेंद्र सिंह का दावा है कि उनके एजेंडे में ग्रामीण
विकास को लेकर कई योजनाएं है। अब 2016 बताएगा
कि ये योजनाएं जमीन पर कितना उतर पाती हैं और कितना असर दिखा पाती हैं।