Wednesday, 15 April 2015

जनता परिवार का कब कब हुआ विलय एक नज़र में

जनता परिवार का अतीत हमेशा से ही मतभेदों भरा रहा है. एकता और एकजुटता की बजाए कलह-कटुता और बिखराव ही जनता दल की कुंडली का लिखा अमिट लेख. आइए जरा नजर डालते हैं जनता दल की बुनियाद से जुड़े नेताओं के बिखराव भरे अतीत पर.
संघर्ष के सिपाही आज मिलने के लिए निकल पड़ें, फिर से उस उजड़े चमन को सजाने जिसकी रौनक अपने ही हाथों से अक्सर मटियामेट करते रहे हैं. इमरजेंसी के बाद देश में जनता सरकार बनीं तो उसी वक्त से जनता परिवार में झगड़े की आग ऐसी सुलगी की लोकनायक जयप्रकाश नारायण का संपूर्ण क्रांति का सपना उन्हीं की आंखों के सामने चकनाचूर हो गया. सत्ता का नशा क्रांति पर काबिज हो गया जिसकी वजह से समाजवादी कुनबा धीरे-धीरे जातीय गोलबंदी की सियासत और वंशवादी गुटों में तब्दील होता चला गया.



जनता सरकार में मोरारजी देसाई और चौधरी चरण सिंह के बीच बंटवारा हो गया. मोरारजी की सरकार से अलग होकर चौधरी चरण सिंह ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार गठित कर ली. जनता सरकार के पतन के बाद जनता पार्टी का समाजवादी कुनबा भी बिखर गया. जिसे जहां राजनीति का रास्ता मिला वो उसी पार्टी के जरिए राजनीति करने लगा और आखिर में राजीव गांधी सरकार के वक्त बोफोर्स की तोप से निकले घोटाले के कथित जिन्न ने नए सिरे से जनता परिवार को एकजुट होने का मौका दिया. राजीव सरकार में वित्त मंत्री रहे विश्वनाथ प्रताप सिंह ने कांग्रेस से बगावत कर दी तो सारे युवा तुर्क उनकी छतरी के नीचे आकर खड़े हो गए. जनता दल की बुनियाद पड़ गई.

11 अक्टूबर 1988 को वीपी सिंह की अगुवाई में जनता दल की बुनियाद पड़ी. जनता पार्टी, जनमोर्चा और लोकदल का जनता दल में विलय हो गया. लेकिन वीपी सिंह सरकार बनने के बाद जनता दल में पहली टूट चंद्रशेखर की अगुवाई में हुई. चंद्रशेखर ने अलग होकर जनता दल समाजवादी का गठन किया. कांग्रेस के समर्थन से वो प्रधानमंत्री बने. हालांकि चंद्रशेखर सरकार चार महीने में ही गिर गई. जनता दल समाजवादी का नाम बदलकर समाजवादी जनता पार्टी हो गया.

फिर तो विभाजन का सिलसिला ही चल पड़ा. अहम की लड़ाई में दिल टूटने के साथ ही दल भी टुकड़े टुकड़े होता चला गया. कोई नेता इधर गया तो कोई उधर. वीपी सिंह, लालू यादव, नीतीश कुमार और शरद यादव के साथ देवेगौड़ा जनता दल को बचाने में जुटे लेकिन कोई तरकीब काम नहीं आई.

जनता दल से अलग हुए चंद्रशेखर और मुलायम सिंह यादव में भी फूट पड़ गई. 1992 में मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी जनता पार्टी से अलग होकर समाजवादी पार्टी का गठन कर लिया. 1992 में चौधरी अजीत सिंह ने भी जनता दल से अलग होकर आरएलडी नामकी नई पार्टी बना ली. ये जनता दल में दूसरी टूट थी.

1994 में जनता दल से अलग होकर जॉर्ज फर्नांडीज और नीतीश कुमार ने समता पार्टी की बुनियाद रखी. ये जनता दल की तीसरी टूट थी.

1996 में कर्नाटक के नेता रामकृष्ण हेगड़े भी जनता दल से अलग हो गए, उन्होंने लोकशक्ति नामक नई पार्टी का गठन कर लिया. ये जनता दल की चौथी टूट थी.

1997 में लालू यादव ने जनता दल से अलग होकर आरजेडी का गठन किया. ये जनता दल में पांचवी बड़ी टूट थी.

1998 में नवीन पटनायक जनता दल से अलग हो गए. ओडिशा में बीजेडी का गठन हुआ. ये जनता दल की छठी बड़ी टूट थी.

1999 में बचे-खुचे जनता दल के भी दो हिस्से बन गए. देवेगौड़ा की अगुवाई में जनता दल सेक्युलर और शरद यादव की अगुवाई में जनता दल यूनाइटेड. ये बिखराव का सातवां अध्याय था जिसमें जनता दल का अस्तित्व हमेशा के लिए खत्म हो गया.

तो ये थी जनता दल की यात्रा के आखिरी पड़ाव तक पहुंचने की छोटी सी कहानी. बंटवारे का सिलसिला आगे भी चलता रहा और जनता दल से निकलकर बनी पार्टियों में भी बिखराव एक सिरे से दूसरे सिरे तक बढ़ता ही गया. मसलन रामविलास पासवान ने जेडीयू से अलग निकलकर लोकजनशक्ति पार्टी का गठन कर लिया और जनता परिवार के नेताओं ने एक एककर सत्ता के लिए ना-ना करते हुए भी प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली एनडीए का दामन भी थाम लिया.

सत्ता के लिए विचार को पीछे छोड़ने के इस सफर में एकजुटता की जरूरत भी वक्त वक्त पर चंद नेताओं ने महसूस की. जॉर्ज फर्नांडीज और नीतीश कुमार की अगुवाई वाले समता पार्टी का विलय शरद यादव की अगुवाई वाली जेडीयू में हो गया. यानी बिखरे जनता परिवार में मिलन की प्रक्रिया भी शुरू हुई जो अब फिर से परवान चढ़ रही है.
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भारत की छह राजनीतिक पार्टियों ने मिलकर एक नया दल बनाने का फ़ैसला कर लिया है.
जनता परिवार के इस विलय का ऐलान दिल्ली में जवता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव ने किया.
उन्होंने ये घोषणा भी की कि इस नए दल के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव होंगे.
जिन छह पार्टियों का विलय होगा वो हैं: जनता दल (यू), समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, भारतीय राष्ट्रीय लोकदल, जनता दल (सेक्यूलर), समाजवादी जनता पार्टी.
य़े सभी एक ज़माने में उस जनता दल का हिस्सा थे जो 1988 में वजूद में आया था. इसीलिए इसे जनता परिवारका विलय भी कहा जा रहा है.
1988 में जनता दल कांग्रेस के खिलाफ वजूद में आया था जिसे तब भाजपा का साथ मिला था. लेकिन आज जो गोलबंदी हो रही है वह भाजपा के खिलाफ हुई है जिसे कांग्रेस का साथ मिलता दिखाई दे रहा है. इस तरह समकालीन भारतीय राजनीति का एक चक्र भी पूरा हुआ है.
क्या है इतिहास
बोफोर्स
बोफोर्स विवाद से शुरू हुई काग्रेस में फूट और जनता दल के शुरू होने की दास्तां
1987 में राजीव गांधी सरकार में वरीय मंत्री रहे कांग्रेस के नेता विश्वनाथ प्रताप सिंह ने बोफोर्स तौप सौदे में हुए कथित भ्रष्टाचार के सवाल पर बगावत कर दी थी.
भ्रष्टाचार के खिलाफ विश्वनाथ प्रताप सिंह ने लोकमोर्चा बनाकर पूरे देश में अभियान चलाया जिसको अच्छा जनसमर्थन मिला.
बना जनता दल
शरद यादव
शरद यादव ने बनाई जनता दल युनाइटेड
बैंगलौर (अब बैंगलुरु) में पुरानी जनता पार्टी के धड़ों, लोकदल और कांग्रेस (एस) ने लोकमोर्चा के साथ मिलकर 1988 में जनता दल का गठन किया. जयप्रकाश नारायण की जयंती के दिन यह दल वजूद में आया था.
1989 के आम चुनाव में कांग्रेस के बाद जनता दल सबसे बड़ी पार्टी बनी. कांग्रेस के सरकार बनाने से इंकार करने पर भाजपा, वामपंथी और क्षेत्रीय दलों के समर्थन से 1989 के दिसंबर में विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधानमंत्री बने.
दो साल में ही हुई पहली टूट
जनता दल ने सत्ता के दरवाज़े पर दस्तक दी और पार्टी में खींच-तान भी शुरु हो गई .
1989 के आम चुनाव के बाद जब जनता दल का नेता चुनने की बारी आई तो पार्टी के तत्कालीन कद्दावर नेता चंद्रशेखर ने देवीलाल का नाम प्रस्तावित किया और देवीलाल ने विश्वनाथ प्रताप सिंह का.
इसके बाद विश्वनाथ प्रताप सिंह मान-मनौव्वल के बाद जनता दल के नेता और फिर भारत के प्रधानमंत्री बने.
इस खींच-तान के एक साल के अंदर ही जनता दल टूट भी गया. 1990 के अक्तूबर में विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार से भाजपा ने समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई.
इस बीच 1990 के नवंबर में चंद्रशेखर ने जनता दल के लगभग 60 सांसदों को साथ लेकर समाजवादी जनता पार्टी बनाई और कांग्रेस के समर्थन से प्रधानमंत्री भी बने.
बिखर गया चक्र
जनता दल का चुनाव चिह्न चक्र था. चंद्रशेखर की अगुवाई में हुई टूट से जनता दल में जो बिखराव शुरु हुआ वो लगभग अगले एक दशक के दौरान कई बार सामने आया. चक्र के सारे हिस्से धीरे-धीरे अलग होते गए.
मुलायम यादव
1992 के अक्तूबर में चंद्रशेखर के नेतृत्व वाली समाजवादी जनता पार्टी से टूट कर मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी बनी.
1994 में नीतीश कुमार और दूसरे नेताओं ने लालू प्रसाद यादव का विरोध करते हुए समता पार्टी का गठन किया.
विश्वनाथ प्रताप सिंह
1997 में लालू प्रसाद यादव तत्कालीन जनता दल के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री थे. तब तक वे बहुचर्चित चारा घोटाले में आरोपित हो चुके थे.
उन पर जनता दल के एक धड़े से दबाव था कि वे पार्टी के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दें.
इस पृष्ठभूमि में उन्होंने 5 जुलाई, 1997 को राष्ट्रीय जनता दल का गठन कर लिया.
वहीं एचडी देवगौड़ा के नेतृत्व में जनता दल (सेक्यूलर) 1999 में वजूद में आया. तब जनता दल से टूट कर यह नई पार्टी बनी थी. उस वक्त शरद यादव जनता दल के अध्यक्ष थे.
बाद में शरद यादव के नेतृत्व में ही जनता दल यूनाइटेड यानी जदयू बनी.
जदयू आज जिस स्वरुप में सामने है वह 2003 में तत्कालीन समता पार्टी और जदयू के विलय के बाद अस्तित्व में आया था.
तब समता पार्टी के अध्यक्ष ज़ॉर्ज फर्नांडीस और जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष शरद यादव थे. विलय के बाद से शरद यादव जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं

Wednesday, 18 March 2015

भूमि अधिग्रहण विधेयक पर किसी भी मंच पर खुली बहस को तैयार नितिन गडकरी


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने ग्रामीण विकास और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान भूमि अधिग्रहण कानून में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। लेकिन कुछ राजनीतिक दल और संगठन राजनीतिक कारणों से इसका विरोध कर रहे हैं।  हमारी सरकार गांव, गरीब, किसान और मजदूरों के हित में काम करने वाली सरकार है।


यूपीए सरकार ने जो भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुन:स्थापन अधिनियम,2013 बनाया था, उसमें 13 कानूनों को सोशल इंपैक्ट और कंसेंट क्लाज से बाहर रखा गया था। इनमें सबसे प्रमुख तो कोयला क्षेत्र अधिग्रहण और विकास कानून 1957 और भूमि अधिग्रहण(खदान) कानून 1885, और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 है। इसके अलावा एटमी ऊर्जा कानून 1962, इंडियन ट्रामवेज एक्ट 1886, रेलवे एक्ट 1989 जैसे कानून प्रमुख हैं। हमने इसमें कुछ और महत्वपूर्ण विषयों को जोडा है। जिससे आप सहमत नही हैं। यह आपका अधिकार है। लेकिन हम आपसे पूछना चाहते हैं, क्या किसानों के खेतों को पानी नही मिलना चाहिए? क्या गांवों में समृद्धि नही आनी चाहिए? क्या देश की सुरक्षा महत्वपूर्ण नही है? हमने जो बदलाव किए हैं वो इन्ही विषयों से संबंधित हैं। ग्रामीण विकास, सिंचाई परियोजनाओं और देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हमने बदलाव किए हैं। रक्षा, ग्रामीण बिजली, सिंचाई परियोजनाएं, गरीबों के लिए घर और औद्योगिक कारीडोर जैसी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण को सोशल इंपैक्ट और कंसेंट क्लाज से बाहर रखे गए कानूनों की सूची में जोडा है।


बदलावों को करते हुए हमने मुआवजे और पुनर्वास से कोई समझौता नही किया है। जिन विषयों को हमने इस सूची में शामिल किया है, उसमें से एक भी किसानों के विरोध में नही है, बल्कि यह विषय उन्हें समृद्धिशाली बनाने वाले हैं। इंडस्ट्रियल कोरीडोर दिल्ली या फिर किसी महानगर में नही बनेगा। यह ग्रामीण इलाको से होकर गुजरेगा। इसके तहत अगर ग्रामीण इलाकों में उद्योग लगते हैं तो इसका सीधा फायदा किसानों को होगा। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। किसानों के फसलों को उनकी फसलों का सही दाम मिलेगा। जहां कच्चा माल मिलेगा वहां उससे संबंधित उद्योग आने की ज्यादा संभावना है। क्या हमारे ग्रामीण युवाओं को रोजगार देना ठीक नही है?
हमने सिंचाई परियोजनाओं के लिए कानून में बदलाव किए हैं। हम सिंचाई के लिए व्यवस्था करना चाहते हैं। ये बदलाव खेतों को पानी उपलब्ध कराने के लिए हैं। जब तक किसानों को पानी नही मिलेगा तब तक हम उन्हें आत्मनिर्भर नही बना पाएंगे। 2000 एकड में अगर हम एरिगेशन प्रोजेक्ट लगाते हैं तो 3 लाख हेक्टेअर खेतों को हम पानी उपलब्ध करा सकते हैं। यह कहां से किसान विरोधी है?  80 फीसदी भूमि सिंचाई के लिए अधिग्रहीत की जाती है। इस पूरे कानून में कोई भी ऐसी बात नही है जो किसानों के विरोध में हो।

यही नही, जमीन मालिक के आलावा भी उस पर निर्भर लोग मुआवजे के हकदार होंगे। पूरा मुआवजा मिलने के बाद ही जमीन से विस्थापन होगा। इन बदलावों में न्यायसंगत मुआवजे के अधिकार और पारदर्शिता पर खास जोर दिया गया है। इसी के आसपास भूमिधारी समुदाय के हकहकूक के मसलों के कानून में रेखांकित किया गया है। अब मुआवजा एक निर्धारित खाते में ही जमा होगा। मुकम्मल पुनर्वास इस कानून का मूल आधार है। बिना उसके कोई भी जमीन किसी भी किसान से देश के किसी भी हिस्से में किसी भी कीमत पर नही ली जा सकेगी। इसके अलावा अब दोषी अफसरों पर अदालत में कार्यवाई हो सकेगी। इसके साथ ही किसानों को अपने जिले में ही शिकायत या अपील का अधिकार होगा। देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी हमने कुछ बदलाव किए। आज देश के लोंगों की गाढी कमाई विदेशों से हथियार मंगाने पर खर्च होती है। क्या हमें इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर नही होना चाहिए? क्या ये देशहित में नही है?
आपके मन में अध्यादेश लाने को लेकर भी सवाल हैं। हम कहना चाहते हैं, किसानों के हित में अध्यादेश लाना जरूरी था। यदि हम अध्यादेश नही लाते तो किसानों को उनकी जमीन का बाजार भाव से चार गुना मुआवजा नही दे सकते थे। इस अध्यादेश की बदौलत ही हम किसानों को उनकी जमीन का चार गुना मुआवजा दे पाए। केवल राजमार्ग मंत्रालय और उर्जा मंत्रालय ने किसानों को 2000 करोड का मुआवजा दिया। यह इसलिए हो सका क्योंकि हम अध्यादेश लेकर आए।

विपक्षी दलों से बातचीत के बगैर कानून में बदलाव का आरोप आप लगा रहे हैं। यह भी ठीक नही है। हमने विज्ञान भवन में सभी राज्यसरकारों के मंत्रियों की बैठक बुलाई थी। जिस बैठक में करीब सभी राज्य सरकारों के प्रतिनिधि मंत्री शामिल हुए। इस विषय में उन राज्य सरकारों के मुख्यमंत्रियों के पत्र भी हमारे पास हैं। हमने जो बदलाव किए उन्ही सरकारों के सुझाव पर किए। इसमें आपकी राज्य सरकारें भी शामिल हैं। यह कानून खेतों, खलिहानों में काम करने वालो और किसानों को समृद्धि बनाने वाला कानून है, गावों में विकास के लिए इस विधेयक का साथ दें। हम इस विधेयक पर आपसे किसी भी मंच पर खुली बहस को तैयार हैं।



                                              




Monday, 9 March 2015

भूमि अधिग्रहण बिल पर आज लोकसभा में वोटिंग

लोकसभा में भूमि अधिग्रहण बिल पर आज हंगामे के आसार है। बिल को आज वोटिंग के लिए पेश किया जाएगा… विपक्ष किसानों के हित में बिल में 52 संशोधनों पर अडा हुआ है
लोकसभा में भूमि अधिग्रहण बिल पर आज हंगामे के आसार है. मंगलवार को बिल को आज वोटिंग के लिए पेश किया जाएगा. हालांकि विपक्ष 'किसानों के हित' में बिल में 52 संशोधनों पर अड़ा हुआ है, लेकिन केंद्र सरकार सात से आठ संशोधन के लिए तैयार है।


 
सरकार बिल में कुछ संशोधन करने पर विचार कर रही है... सरकार के तीन वरिष्ठ मंत्रियों वेंकैया नायडू, अरुण जेटली और वीरेंद्र सिंह ने बिल को लेकर विपक्षी नेताओं से बातचीत भी की है...
सरकार की कोशिश है कि कुछ संशोधनों के साथ विपक्ष उसकी बात मान ले, लेकिन विपक्ष झुकने को तैयार नहीं दिख रहा... कांग्रेस की पीएसी बैठक में फैसला ले लिया गया है कि वह सरकार के किसी भी संशोधन को नहीं मानेगी।
 
सूत्रों के मुताबिक कहना है कि आधिकरिक संशोधन रेल पटरियों और राजमार्ग के दोनों ओर एक   किलोमीटर के दायरे में भूमि अधिग्रहण को सीमित करने से जुड़ा हो सकता है... एक संशोधन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करने से जुड़ा हो सकता है।

3 देशों के दौरे पर आज रवाना होंगे मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज तीन द्वीपीय देशों के पांच दिवसीय दौरे पर रवाना होंगे। इन तीन देशों में सेशेल्स, मॉरीशस और श्रीलंका शामिल हैं।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीलंका, मॉरीशस और सेशेल्स की पांच दिवसीय यात्रा के लिए आज रवाना होंगे और उम्मीद है कि इससे देश के हिंद महासागर क्षेत्र के देशों से रिश्ते और मजबूत होंगे। इसके साथ ही यह भी उम्मीद है कि इस यात्रा के दौरान मोदी श्रीलंका में तमिलों के गढ़ जफना का भी दौरा करेंगे। 



प्रधानमंत्री की यात्रा से पहले विदेश सचिव एस. जयशंकर ने संवाददाताओं से कहा कि इन तीनों देशों के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंध हैं और इन देशों की जनता और भारतीय जनता के बीच भी मजबूत संबंध हैं। उन्होंने कहा कि इन तीनों द्विपीय अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत के वाणिज्यिक सहयोग में वृद्धि हुई है और इससे सहयोग की नई संभावनाएं सामने आई हैं।

इंदिरा गांधी के बाद मोदी सेशेल्स की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। इससे पहले इंदिरा गांधी ने 1981 में सेशेल्स की यात्रा की थी। प्रधानमंत्री मोदी 11-12 मार्च को मॉरीशस की यात्रा पर रहेंगे। मोदी अपनी यात्रा के आखिरी चरण में 13-14 मार्च को श्रीलंका में होंगे और राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के साथ बैठकें करेंगे।

महिला दिवस पर डीआरडीओ के जरिए देशभर में महिला को दिया गया संदेश


महिला दिवस पर डीआरडीओ के जरिए देशभर से आयी महिला वैज्ञानिकों के लिए वर्कशॉप का आयोजन किया है... जिसका उद्घाटन केन्द्रीय मानव संसाधन विकासमंत्री स्मृति ईरानी दीप जलाकर किया है. केन्द्रीय मानव संसाधन विकासमंत्री स्मृति ईरानी सोमवार को दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंची... ये कार्यक्रम डीआरडीओ की ओर से मनाया गया था... जिसमें महिला वैज्ञानिकों के लिए एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया है.. कार्यक्रम का उद्घाटन केन्द्रीयमंत्री ने दीप जलाकर किया... इस दौरान उन्होंने महिलाओं के लिए चल रही योजनाओं के बारे में भी जिक्र किया वहीं स्मृति ईरानी ने मीडिया को बताया कि ये देश की लिए बेहद हर्ष का विषय है क्योंकि देशभर में महिला वैज्ञानिक इस क्षेत्र में रिसर्च और इनोवेशन को कैसे आगे बढ़ा सकती हैं, उसका चिंतन डीआरडीओ में किया जा रहा है.. साथ ही उन्होंने इस कार्यक्रम को एक महिला होने के नाते गर्व का विषय बताया है...। 

मसरत आलम की रिहाई को लेकर बढ़ा विवाद

जम्मू कश्मीर में बीजेपी-पीडीपी का गठबंधन को बनें अभी कुछ ही दिन हुए हैं कि दोनों ही पार्टियों में दरार आता नज़र आ रहा है...अलगाववादी नेता मसरत आलम की रिहाई पर दोनों ही दलों के बीच टकरार पैदा हो गई है. मसरत आलम की रिहाई को लेकर जम्मू कश्मीर में बीजेपी पीडीपी का विवाद बढता जा रहा है....जम्मू में बीजेपी विधायकों और बड़े नेताओं की बैठक हो रही है... बैठक में मुफ्ती के फैसलों और विवादित बयानों को लेकर चर्चा हो रही है.... बैठक में सरकार गिराने या फिर समर्थन वापस जैसे मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद कम है....लेकिन मुफ्ती के फैसलों के विरोध की बात हो रही है. बीजेपी ने कहा ऐसे फैसलों से गठबंधन को खतरा है...कांग्रेस ने पीएम से जवाब मांगा है.

वहीं संसद में बजट सत्र में भी इस मुद्दे को लेकर विपक्ष दल हंगामा कर सकते हैं... जम्मू में हफ्ते भर में ही बात अब गठबंधन टूटने तक पर आ गई है. बीजेपी ने साफ कहा है कि मसरत के मुद्दे पर पार्टी को अंधेरे में रखा गया...विवाद की शुरुआत तो पहले ही दिन हो गई थी . लेकिन यहां तक बात तब पहुंची जब मुफ्ती ने बीजेपी की बात सुननी ही बंद कर दी.

पार्टी ने विरोध जताया था फिर भी अलगाववादी नेता मसरत आलम को जेल से रिहा कर दिया गया. जम्मू में जो बैठक हुई है उसमें सरकार में शामिल कई पार्टी के कई मंत्री मौजूद नहीं थे . ऐसे में सवाल ये है कि क्या अगली बैठक के बाद वाकई में बीजेपी मुफ्ती को बाय बाय कर देगी ? या फिर ऐसे ही चलता रहेगा .

Saturday, 10 January 2015

दिल्ली में मोदी की दहाड़

दिल्ली में विधानसभा चुनाव का विगुल बज चुका हैं। जहां एक ओर तरफ ठंड पर सितम जारी हैं तो वही दूसरी ओर दिल्ली कि सियासत गर्म हो गई है। सभी पार्टीया जनता को लुभाने की कोशिश में लगी हुई हैं। ऐसा ही कुछ आज दिल्ली के बीजेपी रैली में देखने को मिला। दिल्ली के रामलीला मैदान में जहां एक ओर मोदी हुंकार भर रहें थे तो उस समय पुरी दिल्ली की जनता मोदी मय हो चुकी थी। मोदी जब मंच पर पहुचे तब रामलीला मैदान का नजारा देखने लायक था। मोदी रैली में आए हुए सभी लोगों का अभिनंद किया. और कहा की मोदी सरकार जब से केन्द्र में आई हैं तब से देश में नए-नए कार्य किए हैं। मोदी ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में किसी गरीब को बैंक में नहीं देखा जाता था लेकिन मौजूदा सरकार की ‘जनधन योजना’ कार्यक्रम ने गरीबों के लिए बैंक का सपना साकार कर दिया. उन्होंने जिस देश में एक साल में एक करोड़ खाते खुल पाते थे वह मौजूदा सरकार ने एक सप्ताह में कर दिखाया. इसी फेहरिस्त में देश में अब तक 11 करोड़ खाते खुल चुके हैं. इस तरह जीरो बैलेंस पर भी देश में लोगों ने 100-200 रुपये करके 8 हजार 500 करोड़ रुपए जमा किया.

मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि अमित शाह बीजेपी के सर्वाधिक सफल राष्ट्रीय अध्यक्ष बन चुके हैं. दिल्ली में इस रैली में हाल ही में हुए विधान सभा चुनावों में नवनियुक्त बीजेपी के मुख्यमंत्रियों को भी आमंत्रित किया गया था. उन्होंने बीजेपी के नवनियुक्त झारखंड, हरियाणा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों का जमकर बखान किया. भाषण के शुरुआत में तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की तारीफ से की।
कश्मीर चुनाव के लिए वहां की जनता का धन्यवाद भी किया. उन्होंने कहा कि वहां तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद वहां की जनता ने लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए मतदान किया. वहां की जनता ने 70 फीसदी तक मतदान किया.


मोदी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने जम्मू कश्मीर में ऐतिहासिक जीत प्राप्त की है. प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू के कार्यों का जिक्र करते हुए जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि वेंकैया जितना ज्यादा अपने जनपद हैदराबाद के बारे में जानते हैं उतना ही दिल्ली के गली-कूचों के बारे में जानते हैं. मोदी ने बेरोजगारों के भविष्य को लेकर अपने संबोधन में कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार नौजवानों के बारे में लगातार प्रयासरत है. मोदी ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में 40 साल पहले बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था. लेकिन उससे सिर्फ अमीरों को फायदा मिलता था गरीबों को नहीं. बैंकों को भ्रष्टाचार का आड्डा बना दिया गया. दिल्ली में अकेले 19 लाख 50 हजार खाते खोले गए. इसका सीधा मतलब है कि दिल्ली की जनता लगभग पूरी तरह से बैंक खातों से बेदखल थी.

मोदी ने कहा कि दिल्ली में पीने के पानी का पैसा भारत सरकार चुकता कर रही है.प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के तौर शपथ लेते ही मैने पहले ही कहा था कि मौजूदा सरकार गरीबों को समर्पित है. मोदी ने आम आदमी पार्टी पर परोक्ष रूप से हमला बोलते हुए कहा कि दिल्ली में राजनीति चली जाती थी कि दो चार अमीरों को गाली देकर गरीबों को खुश करो. लेकिन अब समय आ गया है कि जनता अमीरों को गाली देने में खुश नहीं होगी. उन्होंने कहा कि दिल्ली को जेनरेटर से मुक्त कर दूंगा. दिल्ली की जनता को बिजली का सर्विस प्रोवाइडर चुनने की सुविधा दिलाएंगे. इससे बिजली प्रोवाइडर कंपनियों में भी अच्छी सुविधा देने का कंपटीशन होगा.

मोदी ने कहा कि देश से भ्रष्टाचार बिल्कुल पूरी तरह से जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सबसे पहले भ्रष्टाचार मुक्त का अभियान जहां मैं बैठता हूं वहीं से शुरू किया है. इस अभियान को गली-मोहल्लों तक लाने वाला हूं. देश को भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाकर रहूंगा. मोदी ने कहा कि मेरा एक सपना है आप लोगों की उसमें मदद चाहिए वह है 2022 में भारत की आजादी के 70 साल हो तब भारत में हर गरीब का पक्का घर हो. हालांकि यह काम छोटा नहीं लेकिन देश की जनता ने इसी तरह के बड़े कामों के लिए हमें चुना है. मोदी ने परोक्ष रूप से आम आदमी पार्टी के नेताओं के जूठ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमें इसके तह में जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि इसका बदला जनता स्वयं देगी. उन्होंने कहा झूठ फैलाना ही उनकी राजनीति का तरीका है.

मोदी ने आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल पर परोक्ष रूप से हमला करते हुए कहा कि जिसको जो काम पसंद हो वह काम दिया जाना चाहिए. मतलब जिन्हें धरना देने, प्रदर्शन करने में महारथ हासिल है उन्हें वह दो और हमें अच्छे शासन के लिए वोट करो. उन्होंने कहा जो अनारकिस्ट हैं उन्हें झारखंड के जंगलों में चले जाना चाहिए. यहां दिल्ली में उनकी कोई जरूरत नहीं.

भाषण के अंत में मोदी ने कहा कि दिल्ली में आप लोग पूर्ण सरकार चुनिए क्योंकि पूर्ण सरकार ना होने की वजह से लोगों का एक साल बर्बाद हुआ. आप लोग प्रदेश को आगे ले जाने के लिए बीजेपी को वोट करें.
अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में मोदी और बीजेपी को जनता कितना दिल्ली में लाभ पहुंचाए

वह तो आने वाला समय ही बतायागा। देखाना होगा की जो सरकार अच्छे दिनों का वादा करती हैं क्या वह दिल्ली में अच्छे दिन ला पाने में कामयाब हो पाएगी।