मुंडे सड़क हादसे का शिकार होने वाले पहले राजनेता नहीं हैं। इससे
पहले पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट, पंजाब
के पूर्व वित्त मंत्री कंवलजीत सिंह, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा
और तेलुगू देशम पार्टी के नेता येरन नायडू भी सड़क हादसे के शिकार हो चुके हैं।
सड़क हादसों में मरते नेता
शोभा नेगी रेड्डी
तारीख - 24 अप्रैल 2014
आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले से लगभग 112 किमी दूर अलागडा से पूर्व विधायक शोभा नेगी रेड्डी की मौत भी सड़क दुर्घटना में हुई। 23 अप्रैल 2014 को देर रात उनकी एसयूवी पलट गई। वह 2014 के विधानसभा चुनाव का प्रचार करके लौट रही थीं। इस हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हुईं और कुछ घंटों बाद उन्होंने हैदराबाद के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया।
येरन नायडू
2 नवंबर, 2012
पूर्व केंद्रीय मंत्री और तेलुगू देशम पार्टी के अध्यक्ष के येरन नायडू की आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। उनकी कार को एक ऑयल टैंकर ने पीछे से टक्कर मार दी थी। वह विशाखापट्टनम में किसी विवाह समारोह से लौट रहे थे। गंभीर रूप से घायल नायडू को कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती कराया गया जहां दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई।वी राधाकृष्णन
वी. राधाकृष्णनन
26 अप्रैल 2010
राजनीतिज्ञ और 14वीं लोकसभा सदस्य वी. राधाकृष्णनन की मॉर्निंग वॉक के दौरान पीछे से आ रहे ट्रक की टक्कर से मौत हो गई थी। यह घटना 22 अप्रैल 2010 को हुई और 26 अप्रैल को अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया।
वाईएसआर रेड्डी
2 सितंबर 2009
आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के कद्दावर नेता और राज्य के मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी का हेलिकॉप्टर हादसे में निधन हो
गया था।
साहिब सिंह वर्मा
30 जून 2007
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष और दिल्ली के सीएम रहे साहिब सिंह वर्मा की जयपुर-दिल्ली हाइवे पर शाहजहांपुर में ट्रक से टकराने पर मौत हो गई थी।
गंति मोहन चंद्र बालयोगी
3 मार्च 2002
पेशे से वकील और राजनीतिज्ञ गंति मोहन चंद्र बालयोगी आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में हेलिकॉप्टर हादसे में मारे गए थे। 12वीं लोकसभा स्पीकर गंति मोहन उस वक्त 50 वर्ष के थे।
माधव राव सिंधिया
30 सितंबर 2001
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के पास विमान दुर्घटना में कांग्रेस मंत्री माधव राव सिंधिया की मौत हो गई थी। विमान में सवार आठों लोग इस हादसे में मारे गए थे। वे शाही परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता ग्वालियर के अंतिम महाराज जिवाजी राव सिंधिया थे।
राजेश पायलट
11 जून 2000
भारत सरकार में मंत्री रह चुके राजेश पायलट की मौत भी जयपुर के निकट एक सड़क दुर्घटना में हुई। राजेश पायलट इंडियन एयर फोर्स में पायलट भी रह चुके थे। पूर्व प्रधानमेत्री राजीव गांधी से उनकी खासी निकटता थी।
ज्ञानी जैल सिंह
25 दिसंबर 1994
भारत के सातवें राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह 29 नवंबर 1994 को सड़क दुर्घटना का शिकार हुए। यह दुर्घटना आनंदपुर साहिब जाते वक्त हुई। उसी वर्ष 25 दिसंबर को हॉस्पिटल में उनका निधन हो गया।
संजय गांधी
23 जून 1980
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के भाई संजय गांधी की हवाई दुर्घटना में मौत हो गई थी। उनका हवाई जहाज सफदरजंग एयरपोर्ट के पास क्रैश हो गया था। पायलट के तौर पर प्रशिक्षित संजय गांधी उस वक्त खुद जहाज उड़ा रहे थे।
बेलगाम होता ट्रैफिक
बढ़ते सड़क हादसे
बेमौत मरती जनता
ग्रामीण विकास मंत्री गोपीनाथ मुंडे की सड़क हादसे में हुई मौत ने... एक बार फिर दिल्ली की सड़कों पर बेलगाम ट्रैफिक की कलई खोलकर रख दी। इस घटना ने साबित कर दिया कि दिल्ली में लोग कितनी लापरवाही के साथ गाड़ियां चलाते हैं। यही वजह है कि सड़क हादसों में हर साल कितने बेकसूर जान गंवा देते हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो एक ऐसी सच्चाई सामने आती है...जो आपको हैरान-परेशान कर सकती है।
बदइंतजामी बयां करते आंकड़े
खूनी सड़कें, खौफनाक हादसे
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी के आकड़ों के मुताबिक 2012 के बाद से देश में हर रोज सड़क हादसों में औसतन 461 लोगों की मौत हो जाती है...और करीब 1,301 लोग घायल हो जाते हैं...रिपोर्ट बताती है देश में हर तीन मिनट में एक मौत सड़क हादसे की वजह से हो जाती है...यहां की खूनी सड़कों पर महज़ एक घंटे के अंदर...करीब 19 लोग मारे जाते हैं।
एक रिसर्च में ये बात भी सामने आई कि सड़क हादसों की वजह से.... पिछले 10 सालों में देश में 12 लाख मासूमों को जान गंवानी पड़ी। विडंबना देखिए कि पिछले 10 साल में इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आपको ये जानकर भी हैरानी होगी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने भारत को दुनिया में सबसे ज्यादा सड़क हादसों वाला देश माना है।
आंकड़े बाताते हैं कि चीन में हर साल 97,551 मौतें सड़क हादसों में होती हैं, वहीं अमेरिका में 41,292 और रूस में 37,349 मौतें सड़क हादसों में होती हैं...लेकिन भारत ने इन सभी देशों को पीछे छोड़ दिया है..2012 में भारत में 1,68,301 लोगों ने सड़क हादसों में जानें गंवाईं। जबकि दूसरे देशों में भारत के मुकाबले कहीं ज्यादा ट्रैफिक है। लेकिन मजबूत ट्रैफिक व्यवस्था और लोगों की समझदारी के चलते वहां सड़का हादसों का ग्राफ काफी नीचे है।
जिंदगी पर भारी सड़क हादसे
देश मौतें (हर साल)
चीन 97,551
अमेरिका 41,292
रूस 37,349
भारत 1,68,301
एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि पूरी दुनिया में हर साल 14 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं। अगर बात की जाए सिर्फ भारत की तो... हमारे देश में 2003 से 2012 के दौरान जनसंख्या वृद्धि दर 13.6 फीसदी रही, जबकि इसी दौरान सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या में 34.2 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई।
2003 - 2012 के आंकड़े
जनसंख्या वृद्धि दर - 13.6 फीसदी
सड़क हादसों में मौतों की दर - 34.2 फीसदी बढ़ी
2012 में दुर्घटनाओं में होने वाली कुल मृत्यु का 35.2 फीसदी सिर्फ सड़क दुर्घटनाओं का नतीजा है। रिपोर्ट के मुताबिक 2012 में यातायात दुर्घटनाओं के कुल 4,73,416 मामले दर्ज किए गए, जिसमें 4,40,042 मामले सड़क दुर्घटना के और 1,762 मामले रेलमार्ग दुर्घटना के तथा 31,612 मामले रेल से जुड़ी अन्य दुर्घटनाओं के थे।
2012 के आंकड़े
यातायात संबंधी दुर्घटनाएं - 4,73,416
सड़क दुर्घटनाएं - 4,40,042
रेलमार्ग दुर्घटनाएं - 33,374
आपको ये जानकर हैरानी होगी कि हमारे देश में हर साल आइसलैंड या मालदीव जैसे छोटे देशों की कुल आबादी की आधी के बराबर जनसंख्या सड़क हादसों की बलि चढ़ जाती है।
सड़क हादसों का सच
दिल्ली में हर पांच लोग सड़क हादसों में जान गंवा रहे हैं... ये खुलासा हुआ है इंटरनेशनल रोड फेडरेशन की एक रिपोर्ट में.. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस भी इस बात को मानती है कि राजधानी में ज्यादातर सड़क हादसे लापरवाही की वजह से होते हैं। इसके अलावा और भी कई ऐसी वजह हैं.. जो लोगों का शानदार सफर... आखिरी सफर में तब्दील हो जाता है।
सड़का हादसों की वजह
लापरवाही 60 फीसदी सड़क हादसों की वजह
स्पीड ब्रेकर के ना होने से ओवर स्पीड का खतरा
खतरनाक ड्राइविंग और स्टंट भी जानलेवा
कई बार नशा और नींद भी बन जाती है मौत की वजह
फुटपाथों पर कब्जे होने से संकीर्ण होते सड़क मार्ग
पैदाल यात्री बढ़ा देते हैं अव्यवस्था
दिल्ली में फुट ओवर ब्रिज और सब-वे की भारी किल्लत
दिल्ली में जाम से निजात दिलाने... यात्रियों को सुविधा देने और ट्रैफिक की रफ्तार को चालू रखने के लिए... हर चौक-चौराहों पर रेड लाइट सिग्नल लगाए गए हैं। लेकिन बड़ी बात ये है कि लोग इन ट्रैफिक सिग्नल्स को फोलो नहीं करते। ये जानते हुए भी कि कई बार रेड लाइट तोड़ना जान पर भारी बन जाता है..बावजूद इसके कुछ लोग नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हैं। आंकड़ों पर अगर गौर किया जाए..तो दिल्ली में सबसे ज्यादा चालान सिग्नल तोड़ने वालों के होते हैं। 2013 में सिग्नल तोड़ने वालों के 3,40,000 चालान काटे गए... जबकि 2014 में 15 मई तक ये संख्या 3,29,000 हो गई।
लालबत्ती का उल्लंधन
2013 3,40,000
2014 (15मई तक) 3,29,000
दिल्ली में जिन जगहों पर सबसे ज्यादा सड़क हादसे होते हैं.. उन टॉप 10 डेंजर रोड्स में अरविंदो रोड भी एक है..जी हां ये वही जगह है..जहां गोपीनाथ मुंडे का एक्सीडेंट हुआ। आंकड़े बताते हैं कि 2009 में..सड़क हादसों की वजह से.. अरबिंदो मार्ग पर 08 लोगों ने जान गंवाईं..जबकि 22 लोग घायल हो गए। 2010 में ये संख्या और बढ़ गई.,. मरने वालों की संख्या 13 और घायलों की 27 हो गई ..2011 में भी कमोबेश ऐसे ही हालात रहे...इस साल यहां 12 लोगों की मौत हुई और 28 लोग घायल हुए...2012 में अरबिंदो मार्ग पर कुल 2 लोगों की मौत हुई लेकिन घायलों का आंकड़ा 18 पहुंच गया।
अरबिंदो मार्ग पर बढ़ते हादसे
साल घायल मौत
2009 22 08
2010 27 13
2011 28 12
2012 18 02
दिल्ली के खूनी सड़कें
मुकुंदपुर चौक, ब्रिटेनिया चौक, शास्त्री पार्क चौराहा, सीलमपुर टी-प्वाइंट, निगम बोध घाट, पंजाबी बाग चौक, शकरपुर चुंगी, महिपालपुर फ्लाइओवर और आश्रम चौक
ये वो तमाम जगहें हैं.. जहां भीड़ ज्यादा होने के साथ-साथ लापरवाही का भी बुरा हाल है... यही वजह है कि इन सड़कों पर सबसे ज्यादा मौतें होती हैं...जाहिर है इन बढ़ते सड़क हादसों के बाद.. ट्रैफिक पुलिस की भूमिका सवालों में आ जाती है.. ..आप भी देखिए पिछले कुछ सालों में ट्रैफिक पुलिस ने इन सड़क हादसों पर लगाम कसने के लिए....क्या कुछ ठोस कदम उठाए।
ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई
शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों पर बरती सख्ती
रात में कमर्शियल वाहनों पर खास निगरानी
ओवरस्पीड और खतरनाक ड्राइविंग पर नियंत्रण
रफ्तार रोकने के लिए खास जगहों पर स्पीड ब्रेकर
कम भीड़ वाली जगहों पर भी ट्रैफिक सिग्नल
दिल्ली की ट्रैफिक पुलिस सड़क हादसों पर काबू करने के लिए...जो दावे कर रही है...उनमें कितनी सच्चाई है.. इसका अंदाजा आप शहर में हर रोज़ होते सड़क हादसों से लगा सकते हैं... अगर वाकई पुलिस ने सख्ती बरती होती..तो देश की राजधानी दिल्ली.. आज खतरे और हादसे की राजधानी ना बनी होती।
दिल्ली को नहीं ट्रैफिक सेंस
गलतियों में सबसे आगे
सड़क हादसों में मरते नेता
शोभा नेगी रेड्डी
तारीख - 24 अप्रैल 2014
आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले से लगभग 112 किमी दूर अलागडा से पूर्व विधायक शोभा नेगी रेड्डी की मौत भी सड़क दुर्घटना में हुई। 23 अप्रैल 2014 को देर रात उनकी एसयूवी पलट गई। वह 2014 के विधानसभा चुनाव का प्रचार करके लौट रही थीं। इस हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हुईं और कुछ घंटों बाद उन्होंने हैदराबाद के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया।
येरन नायडू
2 नवंबर, 2012
पूर्व केंद्रीय मंत्री और तेलुगू देशम पार्टी के अध्यक्ष के येरन नायडू की आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। उनकी कार को एक ऑयल टैंकर ने पीछे से टक्कर मार दी थी। वह विशाखापट्टनम में किसी विवाह समारोह से लौट रहे थे। गंभीर रूप से घायल नायडू को कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती कराया गया जहां दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई।वी राधाकृष्णन
वी. राधाकृष्णनन
26 अप्रैल 2010
राजनीतिज्ञ और 14वीं लोकसभा सदस्य वी. राधाकृष्णनन की मॉर्निंग वॉक के दौरान पीछे से आ रहे ट्रक की टक्कर से मौत हो गई थी। यह घटना 22 अप्रैल 2010 को हुई और 26 अप्रैल को अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया।
वाईएसआर रेड्डी
2 सितंबर 2009
आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के कद्दावर नेता और राज्य के मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी का हेलिकॉप्टर हादसे में निधन हो
गया था।
साहिब सिंह वर्मा
30 जून 2007
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष और दिल्ली के सीएम रहे साहिब सिंह वर्मा की जयपुर-दिल्ली हाइवे पर शाहजहांपुर में ट्रक से टकराने पर मौत हो गई थी।
गंति मोहन चंद्र बालयोगी
3 मार्च 2002
पेशे से वकील और राजनीतिज्ञ गंति मोहन चंद्र बालयोगी आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में हेलिकॉप्टर हादसे में मारे गए थे। 12वीं लोकसभा स्पीकर गंति मोहन उस वक्त 50 वर्ष के थे।
माधव राव सिंधिया
30 सितंबर 2001
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के पास विमान दुर्घटना में कांग्रेस मंत्री माधव राव सिंधिया की मौत हो गई थी। विमान में सवार आठों लोग इस हादसे में मारे गए थे। वे शाही परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता ग्वालियर के अंतिम महाराज जिवाजी राव सिंधिया थे।
राजेश पायलट
11 जून 2000
भारत सरकार में मंत्री रह चुके राजेश पायलट की मौत भी जयपुर के निकट एक सड़क दुर्घटना में हुई। राजेश पायलट इंडियन एयर फोर्स में पायलट भी रह चुके थे। पूर्व प्रधानमेत्री राजीव गांधी से उनकी खासी निकटता थी।
ज्ञानी जैल सिंह
25 दिसंबर 1994
भारत के सातवें राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह 29 नवंबर 1994 को सड़क दुर्घटना का शिकार हुए। यह दुर्घटना आनंदपुर साहिब जाते वक्त हुई। उसी वर्ष 25 दिसंबर को हॉस्पिटल में उनका निधन हो गया।
संजय गांधी
23 जून 1980
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के भाई संजय गांधी की हवाई दुर्घटना में मौत हो गई थी। उनका हवाई जहाज सफदरजंग एयरपोर्ट के पास क्रैश हो गया था। पायलट के तौर पर प्रशिक्षित संजय गांधी उस वक्त खुद जहाज उड़ा रहे थे।
बेलगाम होता ट्रैफिक
बढ़ते सड़क हादसे
बेमौत मरती जनता
ग्रामीण विकास मंत्री गोपीनाथ मुंडे की सड़क हादसे में हुई मौत ने... एक बार फिर दिल्ली की सड़कों पर बेलगाम ट्रैफिक की कलई खोलकर रख दी। इस घटना ने साबित कर दिया कि दिल्ली में लोग कितनी लापरवाही के साथ गाड़ियां चलाते हैं। यही वजह है कि सड़क हादसों में हर साल कितने बेकसूर जान गंवा देते हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो एक ऐसी सच्चाई सामने आती है...जो आपको हैरान-परेशान कर सकती है।
बदइंतजामी बयां करते आंकड़े
खूनी सड़कें, खौफनाक हादसे
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी के आकड़ों के मुताबिक 2012 के बाद से देश में हर रोज सड़क हादसों में औसतन 461 लोगों की मौत हो जाती है...और करीब 1,301 लोग घायल हो जाते हैं...रिपोर्ट बताती है देश में हर तीन मिनट में एक मौत सड़क हादसे की वजह से हो जाती है...यहां की खूनी सड़कों पर महज़ एक घंटे के अंदर...करीब 19 लोग मारे जाते हैं।
एक रिसर्च में ये बात भी सामने आई कि सड़क हादसों की वजह से.... पिछले 10 सालों में देश में 12 लाख मासूमों को जान गंवानी पड़ी। विडंबना देखिए कि पिछले 10 साल में इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आपको ये जानकर भी हैरानी होगी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने भारत को दुनिया में सबसे ज्यादा सड़क हादसों वाला देश माना है।
आंकड़े बाताते हैं कि चीन में हर साल 97,551 मौतें सड़क हादसों में होती हैं, वहीं अमेरिका में 41,292 और रूस में 37,349 मौतें सड़क हादसों में होती हैं...लेकिन भारत ने इन सभी देशों को पीछे छोड़ दिया है..2012 में भारत में 1,68,301 लोगों ने सड़क हादसों में जानें गंवाईं। जबकि दूसरे देशों में भारत के मुकाबले कहीं ज्यादा ट्रैफिक है। लेकिन मजबूत ट्रैफिक व्यवस्था और लोगों की समझदारी के चलते वहां सड़का हादसों का ग्राफ काफी नीचे है।
जिंदगी पर भारी सड़क हादसे
देश मौतें (हर साल)
चीन 97,551
अमेरिका 41,292
रूस 37,349
भारत 1,68,301
एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि पूरी दुनिया में हर साल 14 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं। अगर बात की जाए सिर्फ भारत की तो... हमारे देश में 2003 से 2012 के दौरान जनसंख्या वृद्धि दर 13.6 फीसदी रही, जबकि इसी दौरान सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या में 34.2 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई।
2003 - 2012 के आंकड़े
जनसंख्या वृद्धि दर - 13.6 फीसदी
सड़क हादसों में मौतों की दर - 34.2 फीसदी बढ़ी
2012 में दुर्घटनाओं में होने वाली कुल मृत्यु का 35.2 फीसदी सिर्फ सड़क दुर्घटनाओं का नतीजा है। रिपोर्ट के मुताबिक 2012 में यातायात दुर्घटनाओं के कुल 4,73,416 मामले दर्ज किए गए, जिसमें 4,40,042 मामले सड़क दुर्घटना के और 1,762 मामले रेलमार्ग दुर्घटना के तथा 31,612 मामले रेल से जुड़ी अन्य दुर्घटनाओं के थे।
2012 के आंकड़े
यातायात संबंधी दुर्घटनाएं - 4,73,416
सड़क दुर्घटनाएं - 4,40,042
रेलमार्ग दुर्घटनाएं - 33,374
आपको ये जानकर हैरानी होगी कि हमारे देश में हर साल आइसलैंड या मालदीव जैसे छोटे देशों की कुल आबादी की आधी के बराबर जनसंख्या सड़क हादसों की बलि चढ़ जाती है।
सड़क हादसों का सच
दिल्ली में हर पांच लोग सड़क हादसों में जान गंवा रहे हैं... ये खुलासा हुआ है इंटरनेशनल रोड फेडरेशन की एक रिपोर्ट में.. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस भी इस बात को मानती है कि राजधानी में ज्यादातर सड़क हादसे लापरवाही की वजह से होते हैं। इसके अलावा और भी कई ऐसी वजह हैं.. जो लोगों का शानदार सफर... आखिरी सफर में तब्दील हो जाता है।
सड़का हादसों की वजह
लापरवाही 60 फीसदी सड़क हादसों की वजह
स्पीड ब्रेकर के ना होने से ओवर स्पीड का खतरा
खतरनाक ड्राइविंग और स्टंट भी जानलेवा
कई बार नशा और नींद भी बन जाती है मौत की वजह
फुटपाथों पर कब्जे होने से संकीर्ण होते सड़क मार्ग
पैदाल यात्री बढ़ा देते हैं अव्यवस्था
दिल्ली में फुट ओवर ब्रिज और सब-वे की भारी किल्लत
दिल्ली में जाम से निजात दिलाने... यात्रियों को सुविधा देने और ट्रैफिक की रफ्तार को चालू रखने के लिए... हर चौक-चौराहों पर रेड लाइट सिग्नल लगाए गए हैं। लेकिन बड़ी बात ये है कि लोग इन ट्रैफिक सिग्नल्स को फोलो नहीं करते। ये जानते हुए भी कि कई बार रेड लाइट तोड़ना जान पर भारी बन जाता है..बावजूद इसके कुछ लोग नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हैं। आंकड़ों पर अगर गौर किया जाए..तो दिल्ली में सबसे ज्यादा चालान सिग्नल तोड़ने वालों के होते हैं। 2013 में सिग्नल तोड़ने वालों के 3,40,000 चालान काटे गए... जबकि 2014 में 15 मई तक ये संख्या 3,29,000 हो गई।
लालबत्ती का उल्लंधन
2013 3,40,000
2014 (15मई तक) 3,29,000
दिल्ली में जिन जगहों पर सबसे ज्यादा सड़क हादसे होते हैं.. उन टॉप 10 डेंजर रोड्स में अरविंदो रोड भी एक है..जी हां ये वही जगह है..जहां गोपीनाथ मुंडे का एक्सीडेंट हुआ। आंकड़े बताते हैं कि 2009 में..सड़क हादसों की वजह से.. अरबिंदो मार्ग पर 08 लोगों ने जान गंवाईं..जबकि 22 लोग घायल हो गए। 2010 में ये संख्या और बढ़ गई.,. मरने वालों की संख्या 13 और घायलों की 27 हो गई ..2011 में भी कमोबेश ऐसे ही हालात रहे...इस साल यहां 12 लोगों की मौत हुई और 28 लोग घायल हुए...2012 में अरबिंदो मार्ग पर कुल 2 लोगों की मौत हुई लेकिन घायलों का आंकड़ा 18 पहुंच गया।
अरबिंदो मार्ग पर बढ़ते हादसे
साल घायल मौत
2009 22 08
2010 27 13
2011 28 12
2012 18 02
दिल्ली के खूनी सड़कें
मुकुंदपुर चौक, ब्रिटेनिया चौक, शास्त्री पार्क चौराहा, सीलमपुर टी-प्वाइंट, निगम बोध घाट, पंजाबी बाग चौक, शकरपुर चुंगी, महिपालपुर फ्लाइओवर और आश्रम चौक
ये वो तमाम जगहें हैं.. जहां भीड़ ज्यादा होने के साथ-साथ लापरवाही का भी बुरा हाल है... यही वजह है कि इन सड़कों पर सबसे ज्यादा मौतें होती हैं...जाहिर है इन बढ़ते सड़क हादसों के बाद.. ट्रैफिक पुलिस की भूमिका सवालों में आ जाती है.. ..आप भी देखिए पिछले कुछ सालों में ट्रैफिक पुलिस ने इन सड़क हादसों पर लगाम कसने के लिए....क्या कुछ ठोस कदम उठाए।
ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई
शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों पर बरती सख्ती
रात में कमर्शियल वाहनों पर खास निगरानी
ओवरस्पीड और खतरनाक ड्राइविंग पर नियंत्रण
रफ्तार रोकने के लिए खास जगहों पर स्पीड ब्रेकर
कम भीड़ वाली जगहों पर भी ट्रैफिक सिग्नल
दिल्ली की ट्रैफिक पुलिस सड़क हादसों पर काबू करने के लिए...जो दावे कर रही है...उनमें कितनी सच्चाई है.. इसका अंदाजा आप शहर में हर रोज़ होते सड़क हादसों से लगा सकते हैं... अगर वाकई पुलिस ने सख्ती बरती होती..तो देश की राजधानी दिल्ली.. आज खतरे और हादसे की राजधानी ना बनी होती।
दिल्ली को नहीं ट्रैफिक सेंस
गलतियों में सबसे आगे
दिल्ली में हर रोज़ सड़क हादसे होते हैं..इनमें कितने ही बेगुनाह जान
गंवाते हैं... लेकिन इन हादसों के बाद सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा होता है कि पिछली
गलतियों से हमने क्या सबक लिया? रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री और नैशनल क्राइम
रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि पहले के मुकाबले लोग ट्रैफिक सेंस को लेकर
ज्यादा लापरवाह हो रहे हैं। इतना ही नहीं रिपोर्ट ये भी बताती है कि हम दुनिया के
उन चुनिंदा मुल्कों में से हैं.. जो सड़क पर सबसे ज्यादा गलतियां करते हैं। यही वजह
है कि सबसे ज्यादा हादसे भी इसी देश में होते हैं।
बात की जाए राजधानी दिल्ली की..तो भारतीय शहरों में मुंबई के बाद
सबसे ज्यादा रोड एक्सिडेंट दिल्ली में होते हैं। 2011 में राजधानी में कुल
7281 सड़क हादसे हुए, जबकि मुंबई में यह आंकड़ा 25 हजार 471 था। ब्रिटिश कैपिटल
लंदन के मुकाबले राजधानी दिल्ली में एक्सिडेंट 40 गुना ज्यादा हैं।
सड़क हादसों में मुंबई अव्वल
2011 का रिकॉर्ड
दिल्ली
7281 हादसे
मुंबई
25,471 हादसे
रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री की रिपोर्ट के मुताबिक 77.5 फीसदी सड़क
हादसों के लिए ड्राइवर जवाबदेह होते हैं, जबकि फुटपाथ पर चलने वालों और साइकिल वाले
3.7 फीदसी हादसों के लिए जिम्मेदार होते हैं। रिपोर्ट कहती है कि हादसों के लिए
सड़क को सिर्फ 1.5 फीसदी मामलों में जिम्मेदार करार दिया जा सकता है। ट्रैफिक
विशेषज्ञ भी इस बात को मानते हैं कि अराजक तरीके से ड्राइविंग सड़क हादसों की सबसे
बड़ी वजह है।
देश में बढ़ते सड़क हादसों पर गौर किया जाए तो एक ऐसी तस्वीर सामने
आती है..जिसकी कल्पना भी हम और आप नहीं कर सकते।
सड़क हादसों की हकीकत
सबसे ज्यादा 23.2 फीसदी हादसे दुपहिया वाहनों से होते हैं।
दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा 19.2 फीसदी हादसे ट्रकों से होते हैं।
2011 के मुकाबले 2012 में मरने वालों की संख्या 1.6 फीसदी बढ़ी।
भारत में 2012 में 4,40,042 सड़क हादसों में 1,39,097 मौतें।
77.5 फीसदी हादसों में ड्राईवर की गलती।
देश में हर मिनट में एक सड़क हादसा
हर तीन मिनट में सड़क हादसे में एक मौत
लापरवाही से मौत
धारा 304 (A) के तहत कार्रवाई
सड़क हादसे में मौत के मामले में लापरवाही से मौत का केस दर्ज किया
जाता है..पुलिस ये देखती है कि हादसे में किसकी लापरवाही है..जिसकी लापरवाही सामने
आती है उसी पर मुकदमा दर्ज किया जाता है.. इन मामलों में आईपीसी की धारा 304
(A) के तहत मामला दर्ज किया जाता है.. ऐसे में
दोषी पाए जाने पर 6 महीने कैद हो सकती है। आपको बता दें कि इस तरह के अपराध में
जमानत भी आसानी से मिल जाती है। लेकिन ये हल्का कानून भी इस तरह के सड़क हादसों की
पीछे काफी हद तक जिम्मेदार है। लोग जानते हैं कि अगर उनकी लापरवाही से किसी की जान
चली भी गई तो उन्हें आसानी से बेल मिल जाएगी.. कई बार इस कानून में संशोधन की बात
भी उठाई गई..लेकिन ये मामला हमेशा ही ठंडा पड़ जाता है... यही वजह है कि सड़क
हादसों में मौतों का ग्राफ और ज्यादा बढ़ता जा रहा है।


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