Monday, 30 June 2014

PSLV C23 का सफलतापूर्वक हुआ लॉन्च

देश के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम में उपलब्धि की एक और इबारत लिखते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का ध्रुवीय प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी सी 23) पांच विदेशी उपग्रहों के साथ सोमवार को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष के लिए रवाना हो गया। 
पीएसएलवी ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ठीक सुबह 9 बजकर 52 मिनट पर गगनभेदी गर्जना के साथ उड़ान भरी।

देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम की इस कामयाबी को देखने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अलावा आंध्रप्रदेश के राज्यपाल ई एस एल नरसिम्हन और मुख्यमंत्री के. चंद्रबाबू नायडू (इसरो) के अध्यक्ष के राधाकृष्णन सहित कई वैज्ञानिक और अधिकारी भी मौजूद थे। 

अंतरिक्षयान के सफल प्रक्षेपण के साथ ही समूचा अंतरिक्ष केन्द्र तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। प्रधानमंत्री ने हाथ मिलाकर वैज्ञानिको को बधाई दी। 

अंतरिक्षयान ने निर्धारित समय में सफंलतापूर्वक अपने चार चरणों की यात्रा पूरी की और पांचो उपग्रहों को 665 किलोमीटर ऊपर पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर दिया।

पीएसएलवी की यह पूरी तरह से एक व्यावसायिक उड़ान थी जिसके जरिए पांच विदेशी उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किये गए हैं।

इन उपग्रहों में फ्रांस का 714 किलोग्राम वजनी पृथ्वी निगरानी उपग्रह एसपीओटी-7 है, जर्मनी का 14 किलोग्राम वजनी आइसैट उपग्रह, 15-15 किलोग्राम वजनी कनाडा का एनएलएस 7.1 और एनएलएस 7.2 उपग्रह तथा सिंगापुर का सात किलोग्राम वजनी वेलाक्स उपग्रह शामिल है। 

इसरो की व्यावसायिक इकाई (एंटि्रक्स) द्वारा फ्रांस, र्जमनी, सिंगापुर और कनाडा के साथ इसके लिए करार किया गया था। 

सोमवार की पीएसएलवी की सफल उड़ान ने वैश्विक स्तर पर भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का परचम एक बार फिंर से लहरा दिया है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि यह देश के लिए गौरव का क्षण है। 

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पांच विदेशी उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण भारत की अंतरिक्ष क्षमता की वैश्विक पुष्टि है। 

उन्होंने कहा कि तकनीक को आम लोगों तक पहुचाना होगा जिससे गरीबी और अशिक्षा जैसे समस्याओं से लड़ा जा सकता है। 

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