दो देशों की दो नामी हस्तियों के सम्मान की कहानी...जिन्होंने ज़मीन से
उठकर...आसमान की ऊंचाइयों को छुआ... जिन्होंने जान की बाजी लगाई और दुनिया के लिए
एक बाजीगर बनकर सामने आए...जिनका लोहा पूरे देश माना...यही वजह है कि इन सूरमाओं
को..विश्व के सबसे बड़े सम्मान से नवाजा गया..जी हां हम पात कर रहे हैं...भारत के
सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी की...और पाकिस्तान की रहने वाली मलाला युसुफज़ई
की। इन दोनों ही हस्तियों को... विश्व के सबसे बड़े सम्मान यानी नोबेल पुरस्कार से
नवाजा गया है।
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारत और पाकिस्तान के बीच तल्खी बढ़ी है.... लेकिन दोनों मुल्कों से अमन के दो चेहरों को बुधवार को दुनिया के सर्वोच्च सम्मान... नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया.... भारत के कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई को ये पुरस्कार नार्वे की राजधानी ओस्लो में दिया गया। नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा करीब दो महीने पहले हो गई थी, लेकिन अब बारी आई इन दोनों हस्तियों को साझा सम्मान देने की....तो नोबेल पुरस्कारों के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत और पाकिस्तान के दो शांति दूत.. एक साथ जब सम्मान लेने पहुंचे...तो समारोह में मौजूद हर खास-ओ-आम की नज़र उनपर टिक गईं...हर कोई ये देखकर हैरान था कि..दोनों देशों के बीच भले ही बॉर्डर पर तनावपूर्ण माहौल हो..लेकिन लोगों के दिलों में एक दूसरे के लिए कितनी प्यार और सम्मान भरा है।
पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई भारत के कैलाश सत्यार्थी को पिता के समान बताती है, वहीं सत्यार्थी भी मलाला को अपनी बेटी मानते हैं. भारत और पाकिस्तान के इन दो चेहरों को नोबेल का साझा सम्मान....ऐसे समय में मिला है, जब दोनों देशों के बीच सत्ता से लेकर सरहद तक रिश्ते तल्ख हैं।
मलाला की ख्वाहिश थी कि पुरस्कार के वक्त भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी समारोह में मौजूद रहें....इस ख्वाहिश के पीछे यकीनन मलाला की चाहत...दोनों देशों के बीच अमन का नया रास्ता खोजने की थी, लेकिन ऐसा हो न सका।
बचपन बचाओ आंदोलन के अगुवा.. कैलाश सत्यार्थी भारत में जन्मे पहले शख्स हैं, जिन्हें शांति का नोबल पुरस्कार मिला है। 1979 में मदर टेरेसा के बाद सत्यार्थी दूसरे भारतीय हैं, जिन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया है। वहीं, तालिबानी हमले के बाद से सुर्खियों में रही मलाला पाकिस्तान से शांति का नोबेल पाने वाली पहली शख्सियत हैं.... यही नहीं, मलाला का नाम सबसे कम उम्र की नोबेल विजेता के रूप में भी दर्ज हो गया है।
बहरहाल, कैलाश और मलाला दोनों के लिए ये मौका बेहद अहम है.... इसलिए नहीं कि इन्हें बड़ा सम्मान मिला है... बल्कि इसलिए कि अब इसके साथ नई चुनौतियां भी जुड़ गई हैं.... हालांकि साझे सम्मान के साथ साझी मुहिम के हौसले भी बुलंद हैं, लेकिन फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती... दोनों देशों के बीच स्थाई रूप से अमन का रास्ता ढूंढ़ने की है।
मध्य प्रदेश के विदिशा में 11 जनवरी 1954 को पैदा हुए कैलाश सत्यार्थी.... 'बचपन बचाओ आंदोलन' चलाते हैं...उन्हें बच्चों के शोषण के ख़िलाफ़ और सभी को शिक्षा के अधिकार के लिए संघर्ष करने के लिए... शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया है...पेशे से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर रहे कैलाश सत्यार्थी ने 26 साल की उम्र में ही करियर छोड़कर बच्चों के लिए काम करना शुरू कर दिया था....उन्हें बाल श्रम के ख़िलाफ़ अभियान चलाकर... हज़ारों बच्चों की ज़िंदग़ियां बचाने का श्रेय दिया जाता है....सत्यार्थी इस वक्त 'ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर' यानी बाल श्रम के ख़िलाफ़ वैश्विक अभियान के अध्यक्ष भी हैं।
कैलाश सत्यार्थी के संघर्षों की कहानी किसी से छिपी नहीं है..उनकी वेबसाइट के मुताबिक़ बाल मजदूरों को छुड़ाने के दौरान.... उन पर कई बार जानलेवा हमले भी हुए हैं... 17 मार्च 2011 में दिल्ली की एक कपड़ा फ़ैक्ट्री पर छापे के दौरान...उन पर हमला किया गया.... इससे पहले 2004 में ग्रेट रोमन सर्कस से... बाल कलाकारों को छुड़ाने के दौरान उन पर हमला हुआ। ये सत्यार्थी की जिंदादिली ही थी.. कि बार-बार हमलों के बाद भी उनके इरादों पर विराम नहीं लगा। जिस हौसलों के साथ उन्होंने इस सफर की शुरुआत की थी...वो सफर आज भी बदस्तूर जारी है। बच्चों के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले...कैलाश सत्यार्थी.... ना सिर्फ भारत में...बल्कि विदेशों में भी एक मिसाल के तौर पर जाने जाते हैं। उनकी तम्मना है कि वो बच्चों के शोषण के सिलसिले को जड़ से खत्म कर दें।
बाइट - कैलाश सत्यार्थी, नोबेल विजेता
नोबेल पुरस्कार से पहले उन्हें देश और दुनिया के कई बड़े सम्मान से नवाज़ा जा चुका है। 1994 में जर्मनी का 'द एयकनर इंटरनेशनल पीस अवॉर्ड', 1995 में अमरीका का 'रॉबर्ट एफ़ कैनेडी ह्यूमन राइट्स अवॉर्ड', 2007 में 'मेडल ऑफ़ इटेलियन सीनेट' और 2009 में अमरीका के 'डिफ़ेंडर्स ऑफ़ डेमोक्रेसी अवॉर्ड' समेत कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड मिल चुके हैं।
सत्यार्थी के सम्मान - COMMON HEADER
1994
जर्मनी का 'द एयकनर इंटरनेशनल पीस अवॉर्ड'
1995
अमरीका का 'रॉबर्ट एफ़ कैनेडी ह्यूमन राइट्स अवॉर्ड'
2007
'मेडल ऑफ़ इटेलियन सीनेट'
2009
अमरीका के 'डिफ़ेंडर्स ऑफ़ डेमोक्रेसी अवॉर्ड'
सत्यार्थी को सम्मान देने वाली नोबेल समिति का कहना है कि, "ये पुरस्कार सभी बच्चों के लिए शिक्षा और बच्चों और युवाओं के दमन के खिलाफ किए गए उनके संघर्ष के लिए दिया जा रहा है। ये जरूरी है कि बच्चों का आर्थिक शोषण न हो और हर बच्चा स्कूल जरूर जाए। दुनिया भर में जितने भी गरीब देश हैं, उनकी 60 फीसदी आबादी की उम्र 25 साल से कम है। विशेष रूप से संघर्ष ग्रस्त देशों में, बच्चों की अनदेखी के कारण उनके साथ हो रही हिंसा की समस्या पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती जा रही है।"
नोबेल समिति भी सत्यार्थी का लोहा मान चुकी है...जिस्म पर खादी का कुर्ता और चेहरे पर दाढ़ी लिए...बेहद सादगी से ज़िंदगी बसर करने वाला एक आम शख्स... कैसे इतने बड़े अभियान का रहनुमा बन गया।
महिलाओं के लिए अनिवार्य शिक्षा की मांग करते हुए तालिबानी गोली का शिकार हुईं... पाकिस्तान की सामाजिक कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई को शांति के लिए.. नोबेल पुरस्कार दिया गया... मलाला को पाकिस्तान में महिलाओं के लिए शिक्षा को अनिवार्य बनाए जाने की मांग के बाद... तालिबान की गोली का शिकार होना पड़ा था।
कौन हैं मलाला यूसुफजई ?
मलाला का जन्म 1997 में पाकिस्तान के स्वात जिले में हुआ.....तालिबान ने 2007 से मई 2009 तक स्वात घाटी पर कब्जा कर रखा था... इसी बीच तालिबान के खौफ से लड़कियों ने स्कूल जाना बंद कर दिया था.... मलाल तब आठवीं में पढ़ती थीं और इस नन्ही उम्र में ही उनके संघर्ष शुरू हो गए। 2008 में स्वात घाटी पर कब्जे के बाद...तालिबान ने डीवीडी, डांस और ब्यूटी पार्लर पर बैन लगा दिया... इस दौरान एक ही साल में....घाटी के करीब 400 स्कूल बंद हो गए.... इसके बाद मलाल के पिता उसे पेशावर ले गए... जहां उन्होंने नेशनल प्रेस के सामने एक जोरदार भाषण दिया। उस वक्त मलाला केवल 11 साल की थीं।
मलाला पर तालिबानी हमला
2012 को तालिबानी आतंकी उस बस पर सवार हो गए जिसमें मलाला अपने साथियों के साथ स्कूल जाती थीं... आतंकियों ने मलाला पर एक गोली चलाई... जो उसके सिर में जा लगी। हमले के बाद.. गंभीर रूप से घायल मलाला को इलाज के लिए ब्रिटेन ले जाया गया. यहां उन्हें क्वीन एलिजाबेथ अस्पताल में भर्ती कराया गया... देश-विदेश में मलाला के स्वस्थ्य होने की प्रार्थना की गई और आखिरकार मलाला वहां से ठीक होकर लौटीं।
मलाला की बहादुरी पर उन्हें कई सम्मान भी मिल चुके हैं...अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार, पाकिस्तान का राष्ट्रीय युवा शांति पुरस्कार और कई बड़े सम्मान मलाला के नाम दर्ज होने लगे। 2012 में सबसे ज्यादा प्रचलित शख्सियतों में पाकिस्तान की बहादुर लड़की मलाला युसूफजई के नाम रहा। लड़कियों की शिक्षा के अधिकार की लड़ाई लड़ने वाली मलाला की बहादुरी के लिए... संयुक्त राष्ट्र ने मलाला के 16वें जन्मदिन पर..... 12 जुलाई को मलाला दिवस घोषित किया गया। 2013 में ही मलाला को यूरोपीय यूनियन का प्रतिष्ठित शैखरोव मानवाधिकार पुरस्कार भी मिला।
तालिबानी हमले में बुरी तरह ज़ख्मी होने के बाद... जब मलाला ठीक होकर लौटीं..तो उन्होंने एक ऐसी जंग की शुरूआत की...जहां उनके हर रास्ते पर खतरा ही खतरा था... उन्होंने पाकिस्तान में बच्चों की शिक्षा के लिए मजबूत कदम उठाए। पाकिस्तान में बच्चियों की शिक्षा के लिए आवाज़ उठाने की वजह से ही... मलाला पर तालिबान ने हमला किया था....लंदन में रहकर भी मलाला पाकिस्तान और दुनिया भर में बच्चों की शिक्षा के लिए आवाज़ बुलंद करती रही हैं। मलाला का सपना... दुनिया के हर बच्चे को शिक्षिक करने का है.,..वो कहती हैं कि
ये एक बहुत लंबे सफर की शुरुआत है। करीब पांच करोड़ 70 लाख बच्चे स्कूलों से बाहर हैं, हम हर एक बच्चे को स्कूल भेजना चाहते हैं। मैं वो दिन देखना चाहती हूं जब कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न हो, ये एक बहुत बड़ा अभियान है। इसके लिए सबको मिलकर काम करना होगा, इस लक्ष्य को पाने के लिए ये ज़रूरी है कि दुनिया के नेता इसे पाने के लिए एक हो जाएं और इसे अपनी पहली प्राथमिकता बनाएं।
मलाला ना सिर्फ एक हिम्मत वाली लड़की है...बल्कि वो खुद...आतंकवाद के लिए एक मुंहतोड़ जवाब है। जिसपर हमले होते रहे..और इन हमलों के साथ उसके इरादे और ज्यादा मजबूत होते रहे।
शांति के नोबेल विजेता सत्यार्थी और 17 साल की मलाला को नोबेल मेडल के साथ डिप्लोम...और 11 लाख डॉलर यानी करीब सात करोड़ रुपये की इनामी राशि भी दी गई...इन दोनों विजेताओं का कहना है कि ये इस इनामी राशि को साझा करेंगे। दुनिया के सबसे बड़े सम्मान को हासिल करने वाले सत्यार्थी का कहना है कि
'मैं यह पुरस्कार भारत के बच्चों को समर्पित करना चाहता हूं। मुझे उम्मीद है कि सरकार बाल श्रम खत्म करने के लिए सक्रिय होकर पहल करेगी।' -कैलाश सत्यार्थी
'मेरा इस्लाम में पूरा विश्वास है। इस्लाम शांति का संदेश देता है, लेकिन दुर्भाग्य से यहां ऐसे लोग हैं, जो इस धर्म के बारे में कुछ नहीं जानते।' - मलाला यूसुफजई
सत्यार्थी और मलाला को शांति का नोबेल पुरस्कार नार्वे की राजधानी ओस्लो में दिया गया... जबकि दूसरे क्षेत्रों से जुड़े नोबेल... स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में दिए जा रहे हैं।
अन्य विजेताओं की सूची -
पैट्रिक मोदियानो - साहित्य
शुजी नाकामूरा - भौतिकी
हिरोशी अमानो - भौतिकी
इसामु आकासाकी - भौतिकी
एडवर्ड मोजर - शरीर विज्ञान व औषधि
मे-ब्रिट मोजर - शरीर विज्ञान व औषधि
जॉन ओकीफ - शरीर विज्ञान व औषधि
विलियम एस्को मोइरनर - रसायन शास्त्र
एरिक बेत्जिग - रसायन शास्त्र
स्टीफ हेल - रसायन शास्त्र
ज्यां तिरोल - अर्थशास्त्र
अब तक कुल दस भारतीयों को नोबेल पुरस्कार मिल चुका है.... जिनमें से 1902 और 1907 में... रोनाल्ड रॉस और रुडयार्ड किपलिंग को मेडिसिन और साहित्य के क्षेत्र में नोबेल मिला, जिनका जन्म भारत में हुआ था, लेकिन मूलत: वे ब्रिटिश नागरिक थे.... नॉबेल पुरस्कार जीतने वाले सबसे पहले भारतीय रवींद्र नाथ टैगोर थे, टैगौर को 1913 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1930 में भौतिकी के क्षेत्र में सीवी रमण को, 1968 में मेडिसिन के लिए हरगोविंद खुराना को, 1979 में शांति के लिए मदर टेरेसा को, भौतिकी के क्षेत्र में 1983 में सुब्रह्मणयम चंद्रशेखर को, 1998 में आर्थिक विज्ञान के क्षेत्र में अमर्त्य सेन को, 2007 में शांति के लिए राजेंद्र के पचौरी को और 2009 में रसायनशास्त्र के लिए वेंकटरामन रामकृष्णन को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
नोबेल सम्मान से नवाज़े गए भारतीय -
रवींद्र नाथ टैगोर 1913 साहित्य
सीवी रमन 1930 भौतिकी
हरगोविंद खुराना 1968 मेडिसिन
मदर टेरेसा 1979 शांति
सुब्रह्मणयम चंद्रशेखर 1983 भौतिकी
अमर्त्य सेन 1998 आर्थिक विज्ञान
राजेंद्र के पचौरी 2007 शांति
वेंकटरामन रामकृष्णन 2009 रसायनशास्त्र
दुनिया के इस सबसे बड़े सम्मान को अब तक 889 लोग हासिल कर चुके हैं। जिनमें से भौतिकी के क्षेत्र में 107, रसायन के क्षेत्र में 105, मेडिसिन के क्षेत्र में 107, साहित्य के क्षेत्र में 106, शांति के लिए 94 और आर्थिक विज्ञान के क्षेत्र में 45 लोगों को अभी तक ये पुरस्कृत दिया जा चुका है.।
अब तक कितने नोबेल - COMMON HEADER
भौतिकी 107
रसायन 105
मेडिसिन 107
साहित्य 106
शांति 94
नोबेल पुरस्कार दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक है....यह पुरस्कार स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की याद में हर साल दिया जाता है... 1901 से हर साल....अल्फ्रेड नोबेल के जन्मदिन पर... 10 दिसंबर के दिन...ये पुरस्कार दिया जाता है। पुरस्कार के तौर पर.. 18 कैरेट ग्रीन गोल्ड से बना नोबेल मेडल, नोबेल डिप्लोमा और पुरस्कार शाशि दी जाती है। उम्मीद करते हैं कि सम्मान का ये सिलसिला हमेशा जारी रहे।
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारत और पाकिस्तान के बीच तल्खी बढ़ी है.... लेकिन दोनों मुल्कों से अमन के दो चेहरों को बुधवार को दुनिया के सर्वोच्च सम्मान... नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया.... भारत के कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई को ये पुरस्कार नार्वे की राजधानी ओस्लो में दिया गया। नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा करीब दो महीने पहले हो गई थी, लेकिन अब बारी आई इन दोनों हस्तियों को साझा सम्मान देने की....तो नोबेल पुरस्कारों के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत और पाकिस्तान के दो शांति दूत.. एक साथ जब सम्मान लेने पहुंचे...तो समारोह में मौजूद हर खास-ओ-आम की नज़र उनपर टिक गईं...हर कोई ये देखकर हैरान था कि..दोनों देशों के बीच भले ही बॉर्डर पर तनावपूर्ण माहौल हो..लेकिन लोगों के दिलों में एक दूसरे के लिए कितनी प्यार और सम्मान भरा है।
पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई भारत के कैलाश सत्यार्थी को पिता के समान बताती है, वहीं सत्यार्थी भी मलाला को अपनी बेटी मानते हैं. भारत और पाकिस्तान के इन दो चेहरों को नोबेल का साझा सम्मान....ऐसे समय में मिला है, जब दोनों देशों के बीच सत्ता से लेकर सरहद तक रिश्ते तल्ख हैं।
मलाला की ख्वाहिश थी कि पुरस्कार के वक्त भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी समारोह में मौजूद रहें....इस ख्वाहिश के पीछे यकीनन मलाला की चाहत...दोनों देशों के बीच अमन का नया रास्ता खोजने की थी, लेकिन ऐसा हो न सका।
बचपन बचाओ आंदोलन के अगुवा.. कैलाश सत्यार्थी भारत में जन्मे पहले शख्स हैं, जिन्हें शांति का नोबल पुरस्कार मिला है। 1979 में मदर टेरेसा के बाद सत्यार्थी दूसरे भारतीय हैं, जिन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया है। वहीं, तालिबानी हमले के बाद से सुर्खियों में रही मलाला पाकिस्तान से शांति का नोबेल पाने वाली पहली शख्सियत हैं.... यही नहीं, मलाला का नाम सबसे कम उम्र की नोबेल विजेता के रूप में भी दर्ज हो गया है।
बहरहाल, कैलाश और मलाला दोनों के लिए ये मौका बेहद अहम है.... इसलिए नहीं कि इन्हें बड़ा सम्मान मिला है... बल्कि इसलिए कि अब इसके साथ नई चुनौतियां भी जुड़ गई हैं.... हालांकि साझे सम्मान के साथ साझी मुहिम के हौसले भी बुलंद हैं, लेकिन फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती... दोनों देशों के बीच स्थाई रूप से अमन का रास्ता ढूंढ़ने की है।
मध्य प्रदेश के विदिशा में 11 जनवरी 1954 को पैदा हुए कैलाश सत्यार्थी.... 'बचपन बचाओ आंदोलन' चलाते हैं...उन्हें बच्चों के शोषण के ख़िलाफ़ और सभी को शिक्षा के अधिकार के लिए संघर्ष करने के लिए... शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया है...पेशे से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर रहे कैलाश सत्यार्थी ने 26 साल की उम्र में ही करियर छोड़कर बच्चों के लिए काम करना शुरू कर दिया था....उन्हें बाल श्रम के ख़िलाफ़ अभियान चलाकर... हज़ारों बच्चों की ज़िंदग़ियां बचाने का श्रेय दिया जाता है....सत्यार्थी इस वक्त 'ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर' यानी बाल श्रम के ख़िलाफ़ वैश्विक अभियान के अध्यक्ष भी हैं।
कैलाश सत्यार्थी के संघर्षों की कहानी किसी से छिपी नहीं है..उनकी वेबसाइट के मुताबिक़ बाल मजदूरों को छुड़ाने के दौरान.... उन पर कई बार जानलेवा हमले भी हुए हैं... 17 मार्च 2011 में दिल्ली की एक कपड़ा फ़ैक्ट्री पर छापे के दौरान...उन पर हमला किया गया.... इससे पहले 2004 में ग्रेट रोमन सर्कस से... बाल कलाकारों को छुड़ाने के दौरान उन पर हमला हुआ। ये सत्यार्थी की जिंदादिली ही थी.. कि बार-बार हमलों के बाद भी उनके इरादों पर विराम नहीं लगा। जिस हौसलों के साथ उन्होंने इस सफर की शुरुआत की थी...वो सफर आज भी बदस्तूर जारी है। बच्चों के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले...कैलाश सत्यार्थी.... ना सिर्फ भारत में...बल्कि विदेशों में भी एक मिसाल के तौर पर जाने जाते हैं। उनकी तम्मना है कि वो बच्चों के शोषण के सिलसिले को जड़ से खत्म कर दें।
बाइट - कैलाश सत्यार्थी, नोबेल विजेता
नोबेल पुरस्कार से पहले उन्हें देश और दुनिया के कई बड़े सम्मान से नवाज़ा जा चुका है। 1994 में जर्मनी का 'द एयकनर इंटरनेशनल पीस अवॉर्ड', 1995 में अमरीका का 'रॉबर्ट एफ़ कैनेडी ह्यूमन राइट्स अवॉर्ड', 2007 में 'मेडल ऑफ़ इटेलियन सीनेट' और 2009 में अमरीका के 'डिफ़ेंडर्स ऑफ़ डेमोक्रेसी अवॉर्ड' समेत कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड मिल चुके हैं।
सत्यार्थी के सम्मान - COMMON HEADER
1994
जर्मनी का 'द एयकनर इंटरनेशनल पीस अवॉर्ड'
1995
अमरीका का 'रॉबर्ट एफ़ कैनेडी ह्यूमन राइट्स अवॉर्ड'
2007
'मेडल ऑफ़ इटेलियन सीनेट'
2009
अमरीका के 'डिफ़ेंडर्स ऑफ़ डेमोक्रेसी अवॉर्ड'
सत्यार्थी को सम्मान देने वाली नोबेल समिति का कहना है कि, "ये पुरस्कार सभी बच्चों के लिए शिक्षा और बच्चों और युवाओं के दमन के खिलाफ किए गए उनके संघर्ष के लिए दिया जा रहा है। ये जरूरी है कि बच्चों का आर्थिक शोषण न हो और हर बच्चा स्कूल जरूर जाए। दुनिया भर में जितने भी गरीब देश हैं, उनकी 60 फीसदी आबादी की उम्र 25 साल से कम है। विशेष रूप से संघर्ष ग्रस्त देशों में, बच्चों की अनदेखी के कारण उनके साथ हो रही हिंसा की समस्या पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती जा रही है।"
नोबेल समिति भी सत्यार्थी का लोहा मान चुकी है...जिस्म पर खादी का कुर्ता और चेहरे पर दाढ़ी लिए...बेहद सादगी से ज़िंदगी बसर करने वाला एक आम शख्स... कैसे इतने बड़े अभियान का रहनुमा बन गया।
महिलाओं के लिए अनिवार्य शिक्षा की मांग करते हुए तालिबानी गोली का शिकार हुईं... पाकिस्तान की सामाजिक कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई को शांति के लिए.. नोबेल पुरस्कार दिया गया... मलाला को पाकिस्तान में महिलाओं के लिए शिक्षा को अनिवार्य बनाए जाने की मांग के बाद... तालिबान की गोली का शिकार होना पड़ा था।
कौन हैं मलाला यूसुफजई ?
मलाला का जन्म 1997 में पाकिस्तान के स्वात जिले में हुआ.....तालिबान ने 2007 से मई 2009 तक स्वात घाटी पर कब्जा कर रखा था... इसी बीच तालिबान के खौफ से लड़कियों ने स्कूल जाना बंद कर दिया था.... मलाल तब आठवीं में पढ़ती थीं और इस नन्ही उम्र में ही उनके संघर्ष शुरू हो गए। 2008 में स्वात घाटी पर कब्जे के बाद...तालिबान ने डीवीडी, डांस और ब्यूटी पार्लर पर बैन लगा दिया... इस दौरान एक ही साल में....घाटी के करीब 400 स्कूल बंद हो गए.... इसके बाद मलाल के पिता उसे पेशावर ले गए... जहां उन्होंने नेशनल प्रेस के सामने एक जोरदार भाषण दिया। उस वक्त मलाला केवल 11 साल की थीं।
मलाला पर तालिबानी हमला
2012 को तालिबानी आतंकी उस बस पर सवार हो गए जिसमें मलाला अपने साथियों के साथ स्कूल जाती थीं... आतंकियों ने मलाला पर एक गोली चलाई... जो उसके सिर में जा लगी। हमले के बाद.. गंभीर रूप से घायल मलाला को इलाज के लिए ब्रिटेन ले जाया गया. यहां उन्हें क्वीन एलिजाबेथ अस्पताल में भर्ती कराया गया... देश-विदेश में मलाला के स्वस्थ्य होने की प्रार्थना की गई और आखिरकार मलाला वहां से ठीक होकर लौटीं।
मलाला की बहादुरी पर उन्हें कई सम्मान भी मिल चुके हैं...अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार, पाकिस्तान का राष्ट्रीय युवा शांति पुरस्कार और कई बड़े सम्मान मलाला के नाम दर्ज होने लगे। 2012 में सबसे ज्यादा प्रचलित शख्सियतों में पाकिस्तान की बहादुर लड़की मलाला युसूफजई के नाम रहा। लड़कियों की शिक्षा के अधिकार की लड़ाई लड़ने वाली मलाला की बहादुरी के लिए... संयुक्त राष्ट्र ने मलाला के 16वें जन्मदिन पर..... 12 जुलाई को मलाला दिवस घोषित किया गया। 2013 में ही मलाला को यूरोपीय यूनियन का प्रतिष्ठित शैखरोव मानवाधिकार पुरस्कार भी मिला।
तालिबानी हमले में बुरी तरह ज़ख्मी होने के बाद... जब मलाला ठीक होकर लौटीं..तो उन्होंने एक ऐसी जंग की शुरूआत की...जहां उनके हर रास्ते पर खतरा ही खतरा था... उन्होंने पाकिस्तान में बच्चों की शिक्षा के लिए मजबूत कदम उठाए। पाकिस्तान में बच्चियों की शिक्षा के लिए आवाज़ उठाने की वजह से ही... मलाला पर तालिबान ने हमला किया था....लंदन में रहकर भी मलाला पाकिस्तान और दुनिया भर में बच्चों की शिक्षा के लिए आवाज़ बुलंद करती रही हैं। मलाला का सपना... दुनिया के हर बच्चे को शिक्षिक करने का है.,..वो कहती हैं कि
ये एक बहुत लंबे सफर की शुरुआत है। करीब पांच करोड़ 70 लाख बच्चे स्कूलों से बाहर हैं, हम हर एक बच्चे को स्कूल भेजना चाहते हैं। मैं वो दिन देखना चाहती हूं जब कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न हो, ये एक बहुत बड़ा अभियान है। इसके लिए सबको मिलकर काम करना होगा, इस लक्ष्य को पाने के लिए ये ज़रूरी है कि दुनिया के नेता इसे पाने के लिए एक हो जाएं और इसे अपनी पहली प्राथमिकता बनाएं।
मलाला ना सिर्फ एक हिम्मत वाली लड़की है...बल्कि वो खुद...आतंकवाद के लिए एक मुंहतोड़ जवाब है। जिसपर हमले होते रहे..और इन हमलों के साथ उसके इरादे और ज्यादा मजबूत होते रहे।
शांति के नोबेल विजेता सत्यार्थी और 17 साल की मलाला को नोबेल मेडल के साथ डिप्लोम...और 11 लाख डॉलर यानी करीब सात करोड़ रुपये की इनामी राशि भी दी गई...इन दोनों विजेताओं का कहना है कि ये इस इनामी राशि को साझा करेंगे। दुनिया के सबसे बड़े सम्मान को हासिल करने वाले सत्यार्थी का कहना है कि
'मैं यह पुरस्कार भारत के बच्चों को समर्पित करना चाहता हूं। मुझे उम्मीद है कि सरकार बाल श्रम खत्म करने के लिए सक्रिय होकर पहल करेगी।' -कैलाश सत्यार्थी
'मेरा इस्लाम में पूरा विश्वास है। इस्लाम शांति का संदेश देता है, लेकिन दुर्भाग्य से यहां ऐसे लोग हैं, जो इस धर्म के बारे में कुछ नहीं जानते।' - मलाला यूसुफजई
सत्यार्थी और मलाला को शांति का नोबेल पुरस्कार नार्वे की राजधानी ओस्लो में दिया गया... जबकि दूसरे क्षेत्रों से जुड़े नोबेल... स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में दिए जा रहे हैं।
अन्य विजेताओं की सूची -
पैट्रिक मोदियानो - साहित्य
शुजी नाकामूरा - भौतिकी
हिरोशी अमानो - भौतिकी
इसामु आकासाकी - भौतिकी
एडवर्ड मोजर - शरीर विज्ञान व औषधि
मे-ब्रिट मोजर - शरीर विज्ञान व औषधि
जॉन ओकीफ - शरीर विज्ञान व औषधि
विलियम एस्को मोइरनर - रसायन शास्त्र
एरिक बेत्जिग - रसायन शास्त्र
स्टीफ हेल - रसायन शास्त्र
ज्यां तिरोल - अर्थशास्त्र
अब तक कुल दस भारतीयों को नोबेल पुरस्कार मिल चुका है.... जिनमें से 1902 और 1907 में... रोनाल्ड रॉस और रुडयार्ड किपलिंग को मेडिसिन और साहित्य के क्षेत्र में नोबेल मिला, जिनका जन्म भारत में हुआ था, लेकिन मूलत: वे ब्रिटिश नागरिक थे.... नॉबेल पुरस्कार जीतने वाले सबसे पहले भारतीय रवींद्र नाथ टैगोर थे, टैगौर को 1913 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1930 में भौतिकी के क्षेत्र में सीवी रमण को, 1968 में मेडिसिन के लिए हरगोविंद खुराना को, 1979 में शांति के लिए मदर टेरेसा को, भौतिकी के क्षेत्र में 1983 में सुब्रह्मणयम चंद्रशेखर को, 1998 में आर्थिक विज्ञान के क्षेत्र में अमर्त्य सेन को, 2007 में शांति के लिए राजेंद्र के पचौरी को और 2009 में रसायनशास्त्र के लिए वेंकटरामन रामकृष्णन को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
नोबेल सम्मान से नवाज़े गए भारतीय -
रवींद्र नाथ टैगोर 1913 साहित्य
सीवी रमन 1930 भौतिकी
हरगोविंद खुराना 1968 मेडिसिन
मदर टेरेसा 1979 शांति
सुब्रह्मणयम चंद्रशेखर 1983 भौतिकी
अमर्त्य सेन 1998 आर्थिक विज्ञान
राजेंद्र के पचौरी 2007 शांति
वेंकटरामन रामकृष्णन 2009 रसायनशास्त्र
दुनिया के इस सबसे बड़े सम्मान को अब तक 889 लोग हासिल कर चुके हैं। जिनमें से भौतिकी के क्षेत्र में 107, रसायन के क्षेत्र में 105, मेडिसिन के क्षेत्र में 107, साहित्य के क्षेत्र में 106, शांति के लिए 94 और आर्थिक विज्ञान के क्षेत्र में 45 लोगों को अभी तक ये पुरस्कृत दिया जा चुका है.।
अब तक कितने नोबेल - COMMON HEADER
भौतिकी 107
रसायन 105
मेडिसिन 107
साहित्य 106
शांति 94
आर्थिक विज्ञान 45
नोबेल पुरस्कार दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक है....यह पुरस्कार स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की याद में हर साल दिया जाता है... 1901 से हर साल....अल्फ्रेड नोबेल के जन्मदिन पर... 10 दिसंबर के दिन...ये पुरस्कार दिया जाता है। पुरस्कार के तौर पर.. 18 कैरेट ग्रीन गोल्ड से बना नोबेल मेडल, नोबेल डिप्लोमा और पुरस्कार शाशि दी जाती है। उम्मीद करते हैं कि सम्मान का ये सिलसिला हमेशा जारी रहे।

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