पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने अपनी कड़वी
जुबान से... कुछ ऐसे घिनौने राज़ उगले हैं जिनकी बानगी सुनकर आप भी सकते में पड़
जाएंगे। जी हां पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और सैन्य तानाशाह... परवेज मुशर्रफ
ने कहा कि आत्मसम्मान की बलि देकर भारत से दोस्ती नहीं की जा सकती।
पाकिस्तानी टीवी चैनल के साथ एक इंटरव्यू में परवेज मुशर्रफ ने कहा कि लोगों की ये गलत धारणा है कि वह भारत से दोस्ती नहीं चाहते। अपने कार्यकाल के संबंधों का जिक्र करते हुए मुशर्रफ ने कहा कि उनके कार्यकाल में दोनों देशों के बीच बेहतर संबंध रहे हैं। उनके नेतृत्व में दोनों देश कश्मीर, सर क्रीक और पानी मसले से जुड़े अहम विवाद को खत्म करने के करीब पहुंच गए थे। लेकिन जब न्यूज़ एंकर ने उनसे कारगिल ऑपरेशन का मास्टरमाइंड होने के बारे में सवाल पूछा....तो उन्होंने इसपर सहमति जताते हुए कहा कि करगिल घुसपैठ का पूरा ताना-बाना भारत से बदला लेने के लिए बुना गया था।
परवेज मुशर्रफ ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप किया। जिसका दंड उसे करगिल में दिया गया। भारत ने भी बांग्लादेश के गठन में भूमिका निभाई इसीलिए करगिल युद्ध हुआ। मुशर्रफ ने कहा कि ऐसा करके पाकिस्तान ने कोई गलती नहीं की। मुशर्रफ की बेशर्मी तो देखिए कि अपनी करतूतों का ठीकरा भारत पर फोड़ते हुए उसने... सीमा पर फायरिंग के लिए भी भारत को ही जिम्मेदार ठहरा दिया। उन्होंने कहा कि हम भारत से दोस्ती करना चाहते हैं, लेकिन पहले भारत को सीमा पर फायरिंग बंद करनी होगी और हमारे जवानों को मारना बंद करना होगा, तभी सीमा पर शांति स्थापित हो सकती है।
इससे पहले भी पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने... युद्धविराम के उल्लंघन का ठीकरा भारत के सिर ही फोड़ा... मुशर्रफ ने उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत को सही ठहराते हुए भारत को ये चेतावनी दी थी...कि भारत, पाकिस्तान के सब्र का इम्तिहान न ले।
दुनिया जानती है कि पाकिस्तान की सरज़मी पर आतंक की खेप तैयार की जाती है। पाकिस्तान खूंखार आतंकियों की फौज तैयार करता है... और फिर उसे इंसानियत का कत्ल करने के लिए भारत समेत दूसरे देशों में सप्लाई करता है। अमेरिका में हुआ 9/11 का आतंकी हमला हो...या फिर मुंबई में हुआ 26/11 का आतंकी हमला... हर बार हमलों के पीछे पाकिस्तान की शर्मनाक भूमिका सामने आई....हर बार दहशतगर्दों को पनाह देने के आरोप में....अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की किरकिरी हुई। फिर चाहे हो अमेरिका में दहशत फैलाने वाला ओसामा बुन लादेन हो...या मुंबई में सैकड़ों लोगों का खून बहाने वाला अजमल आमिर कसाब हो। चाहे भारत की संसद पर आतंकी हमले की साजिश रचने वाला अफज़ल गुरू हो..या फिर पिछले तीन दशकों से देश में खौफ का सबब बन चुका..दाउद इब्राहिम कास्कर हो। ये सभी दहशतगर्द पाकिस्तान की सरज़मी पर जन्में और पले-बढ़े वो सपोले हैं... जिनकी रग-रग में ज़हर भरा है। लेकिन परवेज मुशर्रफ उल्टे भारत पर ही आतंकवाद की फंडिंग का आरोप लगा रहे हैं। मुशर्रफ ने कहा कि मोदी की सरकार में भारत और पाकिस्तान की दोस्ती संभव है। लेकिन भारत सीजफायर का उल्लंघन करता रहे, हमारे सैनिकों की हत्या करे, ब्लुचिस्तान में आतंकवाद की फंडिंग करता रहे तो ऐसे में कैसे रिश्ते सुधर सकते हैं। हम भारत से रिश्ते सुधारना चाहते हैं लेकिन आत्मसम्मान की कीमत पर पाकिस्तान भारत के आगे झुकने वाला नहीं है।
मतलब साफ है कि या तो मुशर्रफ साहब की याददास्त कमजोर हो चुकी है...या फिर आज तक किसी ने उन्हें अपनी गिरेबां में झांकने की हिदायत नहीं दी। यही वजह है कि वो इस तरह के बेतुके बयान देकर... पाकिस्तान में अपना पोलिटिकल ग्राउंड मजबूत करने में लगे हैं। ताकि आवाम को भारत के खिलाफ भड़काकर वो अपने लिए सत्ता का रास्ता साफ कर सकें। लेकिन मुशर्रफ साहब मत भूलिए कि जिस लड़ाई का आप बहादुरी से सीना ठोंक कर जिक्र कर रहे हैं.,..उसी करगिल की लड़ाई में आपको मुंह की खानी पड़ी थी। करगिल की लड़ाई पर बेबाकी से बोलने बाले मुशर्रफ की इससे बड़ी बेशर्मी और भला क्या होगी।
पाकिस्तानी टीवी चैनल के साथ एक इंटरव्यू में परवेज मुशर्रफ ने कहा कि लोगों की ये गलत धारणा है कि वह भारत से दोस्ती नहीं चाहते। अपने कार्यकाल के संबंधों का जिक्र करते हुए मुशर्रफ ने कहा कि उनके कार्यकाल में दोनों देशों के बीच बेहतर संबंध रहे हैं। उनके नेतृत्व में दोनों देश कश्मीर, सर क्रीक और पानी मसले से जुड़े अहम विवाद को खत्म करने के करीब पहुंच गए थे। लेकिन जब न्यूज़ एंकर ने उनसे कारगिल ऑपरेशन का मास्टरमाइंड होने के बारे में सवाल पूछा....तो उन्होंने इसपर सहमति जताते हुए कहा कि करगिल घुसपैठ का पूरा ताना-बाना भारत से बदला लेने के लिए बुना गया था।
परवेज मुशर्रफ ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप किया। जिसका दंड उसे करगिल में दिया गया। भारत ने भी बांग्लादेश के गठन में भूमिका निभाई इसीलिए करगिल युद्ध हुआ। मुशर्रफ ने कहा कि ऐसा करके पाकिस्तान ने कोई गलती नहीं की। मुशर्रफ की बेशर्मी तो देखिए कि अपनी करतूतों का ठीकरा भारत पर फोड़ते हुए उसने... सीमा पर फायरिंग के लिए भी भारत को ही जिम्मेदार ठहरा दिया। उन्होंने कहा कि हम भारत से दोस्ती करना चाहते हैं, लेकिन पहले भारत को सीमा पर फायरिंग बंद करनी होगी और हमारे जवानों को मारना बंद करना होगा, तभी सीमा पर शांति स्थापित हो सकती है।
इससे पहले भी पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने... युद्धविराम के उल्लंघन का ठीकरा भारत के सिर ही फोड़ा... मुशर्रफ ने उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत को सही ठहराते हुए भारत को ये चेतावनी दी थी...कि भारत, पाकिस्तान के सब्र का इम्तिहान न ले।
दुनिया जानती है कि पाकिस्तान की सरज़मी पर आतंक की खेप तैयार की जाती है। पाकिस्तान खूंखार आतंकियों की फौज तैयार करता है... और फिर उसे इंसानियत का कत्ल करने के लिए भारत समेत दूसरे देशों में सप्लाई करता है। अमेरिका में हुआ 9/11 का आतंकी हमला हो...या फिर मुंबई में हुआ 26/11 का आतंकी हमला... हर बार हमलों के पीछे पाकिस्तान की शर्मनाक भूमिका सामने आई....हर बार दहशतगर्दों को पनाह देने के आरोप में....अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की किरकिरी हुई। फिर चाहे हो अमेरिका में दहशत फैलाने वाला ओसामा बुन लादेन हो...या मुंबई में सैकड़ों लोगों का खून बहाने वाला अजमल आमिर कसाब हो। चाहे भारत की संसद पर आतंकी हमले की साजिश रचने वाला अफज़ल गुरू हो..या फिर पिछले तीन दशकों से देश में खौफ का सबब बन चुका..दाउद इब्राहिम कास्कर हो। ये सभी दहशतगर्द पाकिस्तान की सरज़मी पर जन्में और पले-बढ़े वो सपोले हैं... जिनकी रग-रग में ज़हर भरा है। लेकिन परवेज मुशर्रफ उल्टे भारत पर ही आतंकवाद की फंडिंग का आरोप लगा रहे हैं। मुशर्रफ ने कहा कि मोदी की सरकार में भारत और पाकिस्तान की दोस्ती संभव है। लेकिन भारत सीजफायर का उल्लंघन करता रहे, हमारे सैनिकों की हत्या करे, ब्लुचिस्तान में आतंकवाद की फंडिंग करता रहे तो ऐसे में कैसे रिश्ते सुधर सकते हैं। हम भारत से रिश्ते सुधारना चाहते हैं लेकिन आत्मसम्मान की कीमत पर पाकिस्तान भारत के आगे झुकने वाला नहीं है।
मतलब साफ है कि या तो मुशर्रफ साहब की याददास्त कमजोर हो चुकी है...या फिर आज तक किसी ने उन्हें अपनी गिरेबां में झांकने की हिदायत नहीं दी। यही वजह है कि वो इस तरह के बेतुके बयान देकर... पाकिस्तान में अपना पोलिटिकल ग्राउंड मजबूत करने में लगे हैं। ताकि आवाम को भारत के खिलाफ भड़काकर वो अपने लिए सत्ता का रास्ता साफ कर सकें। लेकिन मुशर्रफ साहब मत भूलिए कि जिस लड़ाई का आप बहादुरी से सीना ठोंक कर जिक्र कर रहे हैं.,..उसी करगिल की लड़ाई में आपको मुंह की खानी पड़ी थी। करगिल की लड़ाई पर बेबाकी से बोलने बाले मुशर्रफ की इससे बड़ी बेशर्मी और भला क्या होगी।

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