Thursday, 25 December 2014

कैसा ये इश्क है ?

 देशभर में एसिड अटैक की वारदातें बढ़ती जा रही हैं। आंकड़े बतातें हैं कि अकेले भारत में... हर साल तकरीबन 500 लड़कियों पर... तेजाबी हमले होते हैं। यानी हर साल एसिड अटैक की वजह से... 500 लड़कियां अपनी खूबसूरती को गंवाकर.. एक बोझिल जिंदगी जीने को मजबूर हो जाती है। जहां ना कोई जीवन साथी है.,.और ना कोई हितैशी.... उनके ज़हन में उस खौफनाक दौर की यादें बस जाती हैं। जिस दिन उन्हें ज़िंदगी की सबसे दर्दनाक सज़ा दी गई थी। कई लड़कियां तो इन हमलों में अपनी जान तक गंवा बैठती हैं...और जो जिंदगी की जंग जीत जाती हैं...उनकी जिंदगी कई बार मौत से भी बदतर हो जाती है। लेकिन इस अपराध को अंजाम देने वाले कुछ दिन सलाखों में रहने के बाद... मौज से जिंदगी गुज़ारते हैं। 


दिल्ली के राजौरी गार्डन इलाके में महिला डॉक्टर पर तेजाब फेंके जाने की वारदात के बाद... सनसनी फैल गई... इस वारदात के बाद... दिल्ली में खौफ पसरा था... हर कोई डरा सहमा था...और सबके ज़हन में एक ही सवाल कौंध रहा था कि आखिर कौन है वो नकाबपोश... जो महिलाओं पर बसरा रहा है खौलता तेजाब। इस वारदात के बाद बुरी तरह झुलसी महिला डॉकटर की हालत इतनी गंभीर थी...कि वो पुलिस को कुछ नहीं बता पाई। वहीं ये खौफनाक घटना सड़क पर लगे सीसीटीवी कैमरे में तो कैद हो गई... लेकिन कैमरों में कैद हुई तस्वीरों की बिनाह पर... हमलावरों को पहचान पाना मुमकिन नहीं था।
गौरतलब है कि लेडी डॉक्टर पर एसिड फेंकने वाले ब्लैक बाइक पर सवार दोनों ही युवकों ने चेहरे पर कपड़ा बांधा हुआ था। पीछे सवार युवक ने जैकेट के कॉलर ऊपर उठाए हुए थे और काला चश्मा लगाया हुआ था। ऐसे में दिल्ली पुलिस के लिए भी इस केस को सुलझा पाना...एक बड़ी चुनौती बन चुकी थी। पुलिस परेशान थी कि आखिर करे तो क्या करे। कहां से उन मनमलों पर गिरफ्तार करे...जिन्होंने पेशे से डॉक्टर एक महिला को मौत की दहलीज़ पर पहुंचा दिया।
ये गुनहगार इतने शातिर थे..कि पुलिस को गुमराह करने के लिए इन्होंने इस वारदात को लूट का शक्ल देने की भी कोशिश की...इसके तहत बाइक चला रहे शख्स ने लेडी डॉक्टर का हैंडबैग झपटा....और पीछे बैठे शख्न ने...डॉक्टर के चेहरे पर बोतल से तेजाब फेंक दिया...लेकिन ये बात पुलिस के गले नहीं उतर रही थी कि कैसे कोई शख्स... चंद रुपयों की लूट के लिए...इतने संगीन अपराध को अंजाम दे सकता था। इस वारदात के पीछे उलझी गुत्थी को सुलझाने के लिए... दिल्ली पुलिस ने 12 टीमें बनाईं...मामले की पेचीदगी से पड़ताल कर रही दिल्ली पुलिस आखिरकार ऐसे मोड़ पर जा पहुंची। जहां इस वारदात से जुड़े सटीक क्लू...पुलिस के सामने आ गए। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने जो सनसनीखेज़ खुलासा किया... उसकी हकीकत जानकर हर कोई दंग रह गया।
जी हां इस हमले के पीछे छिपी थी...मोहब्बत में नाकाम हुए एक सिरफिरे आशिक की सनक... जी हां दिल्ली ESI अस्पताल की लेडी डॉक्टर पर एसिड अटैक की वारदात में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के मुताबिक एक डॉक्टर ने ही उन्हें... एसिड फेंकने का कॉन्ट्रैक्ट दिया था। पुलिस ने बताया कि ये वारदात डॉक्टर अमृत कौर के पुराने जानकार युवक ने कराई। उस डॉक्टर ने पैसे देकर खरीदे हुए हमलावरों से...डां. अमृत कौर पर तेजाबी हमला करा दिया। हालांकि इस मामले में अभी और भी खुलासे होने बाकी हैं, लेकिन बताया जा रहा है कि पेशे से डॉक्टर....वो युवक अमृत कौर से इकतरफा प्यार करता था....लेकिन इस बीच अमृत कौर की शादी किसी और से तय होने से...वो इस कदर हताश हो चुका था कि उसने अमृत को बदसूरत बनाने के लिए...इस साजिश का ताना-बाना बुन दिया। और फिर भाड़े के हमलावरों से इस वारदात को अंजाम तक भी पहुंचवा दिया।

हालांकि इस घिनौने अपराध को अंजाम देने वाले भी पुलिस के शिकंजे से बच न सके। घटना के दो दिन बाद ही...हमलावर के चेहरे भी बेपर्दा हो गए। लेकिन सवाल ये खड़ा होता है कि न लोगों की गिरफ्तारी से... क्या डॉ. कौर को इंसाफ मिल पाएगा।
करीब एक साल पहले एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए... सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों में तेजाब की खुली बिक्री पर रोक लगाने के आदेश दिए थे। बावजूद इसके देश भर में तेजाब की खुलेआम खरीद फरोख्त चल रही है। बात करें राजधानी दिल्ली की..तो दिल्ली एनसीआर में भी आसानी से तेजाब लोगों की पहुंच में है। और सबसे हैरानी वाली बात तो ये है कि...सुप्रीम कोर्ट के नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों के लिए... कोई कार्रवाई नहीं की जाती..यही वजह है कि तेजाब हर साल हजारों मासूम लड़कियों की जिंदगी में जहर घोल रहा है।
िल्ली में कई किराने की दुकानों में टॉयलेट क्लीनर के तौर पर...CONCENTRATED ACID  की बिक्री की जा रही है। न तो दुकानदार इसके खरीदारों का कोई रिकॉर्ड रखते हैं और न ही इसके लिए ग्राहकों से कोई पूछताछ की जाती है। महज़ 10 से 20 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर लोग किराने की दुकान से आसानी से तेजाब खरीद सकते हैं। जबकि नियम ये है कि किसी भी 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति को.... तेजाब नहीं बेचा जा सकता है। साथ ही इसकी बिक्री करने पर दुकानदार को खरीदार का पहचान पत्र देखना होगा और उसका रिकॉर्ड रखना होगा। लेकिन दुकानदार खुलेआम इन नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। दुकानदारों की अनदेखी के चलते... मनचले आसानी से तेजाब खरीदते हैं...और फिर उसे हथियार बनाकर... लड़कियों पर वार करते हैं।
दिल्ली के कई इलाकों में तो वेंडर्स...  लोगों के घर-घर जाकर टॉयलेट क्लीनर के नाम पर एसिड मुहैया करा रहे हैं। अब इसे प्रशासन की अनदेखी ही कहिए कि इनपर वेंडर्स पर कोई रोक नहीं लगाई जा रही। सुप्रीम कोर्ट ने तेजाब की बिक्री करने वालों के लिए कुछ खास नियम कानून निर्धारित किए हैं। मसलन

तेज़ाब बिक्री के नियम
18 साल से कम उम्र के व्यक्ति को तेजाब की बिक्री नहीं की जा सकती
किसी भी दुकानदार को तेजाब बेचने के लिए उसका रिकॉर्ड रखना होगा
किसी व्यक्ति को तेजाब बेचते वक्त उसके फोटो और पहचान पत्र की जांच जरूरी है इसमें व्यक्ति के घर का पता भी होना चाहिए।
तेजाब खरीदने की वजह भी दुकानदार को ग्राहक से पूछनी होगी
दुकानदार के पास तेजाब का कितना स्टॉक मौजूद है इस बात की जानकारी 15 दिन के अंदर एसडीएम को उपलब्ध करानी होगी
स्टॉक की सूचना न देने की हालत में एसडीएम दुकानदार पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगा सकते हैं
इसके अलावा जिन अस्पतालों, एजुकेश्नल इंस्टीट्यूट और लैबोरेटरीज़ में तेजाब का इस्तेमाल किया जा रहा है, उन्हें इसके इस्तेमाल का रिकॉर्ड रखना होगा और साथ ही इसकी जानकारी एसडीएम को भी उपलब्ध करानी होगी।


तेजाब की बिक्री को लेकर नियम-कायदे तो बहुत हैं....लेकिन इन कानूनों का कितना पालन किया जाता है.... इनकी बानगी बयां कर रहे हैं... देशभर में लड़कियों पर हो रहे तेजाबी हमले। जहां हर रोज़ कोई न कोई बकसूर लड़की तेजाबी हमलों का शिकार होकर...मौत से बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हो रही है। 

एसिड अटैक करने वालों के खिलाफ...केन्द्र सरकार गंभीर नज़र आ रही है। देश में लगातार बढ़ते एसिड अटैक को देखते हुए मोदी सरकार ने इस अपराध को बेहद संगीन मामलों में शामिल करने का फैसला किया है। गौरतलब है कि इसके लिए मौजूदा आईपीसी कानून में बदलाव किया गया है। हाल ही में होम मिनिस्ट्री की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि इस बारे में लॉ कमिशन की अनुशंसा को भी मान लिया गया है, और अंतिम मंजूरी के लिए जल्द ही कैबिनेट के पास इसे पेश किया जाएगा।

मिनिस्ट्री की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, कानून में बदलाव के बाद एसिड अटैक के मामले में... आरोप साबित होने पर अपराधियो को फांसी या उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है। इसके लिए सुनवाई की समयसीमा 60 दिन तय की गई है। साथ ही एसिड अटैक के शिकार लोगों का ट्रीटमेंट मुफ्त किया जाएगा, इसके लिए होने वाला खर्च गृह मंत्रालय उठाएगा। हमले के शिकार लोगों को फिजिकली चैलेंज्ड माना जाएगा और उन्हें रिजर्वेशन, ट्रेनिंग और लोन फैसिलिटी भी मिल सकेगी। इससे उनके पुनर्वास में भी मदद मिलेगी।

इसके अलावा एसिड अटैक की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सरकार ने एसिड की बिक्री के नियमों में भी बदलाव करने की पहल की है। इसके तहत सारे एसिड विक्रेताओं को एक वेब ऐप्लिकेशन से जोड़ा जाएगा और उनके स्टॉक और बिक्री पर लगातार नजर रखी जाएगी। मिनिस्ट्री के मुताबिक, एसिड बिक्री पर नजर रखने से भी ऐसे अपराध पर काबू पाया जा सकेगा।

गौरतलब है कि तेजाब की खुली ब्रिक्री पर अंकुश लगाकार...सरकार एसिड एटैक का घटनाओं को कम करना चाहती है..लेकिन ये सरकार की इन नई गाइनलाइंस के बाद....इस अपराध पर किस हद तक लगाम लग पाएगी। फिलहाल कहना मुश्किल है।
भारत समेत दक्षिण एशियाई देशों में...एसिड अटैक बेहद गंभीर अपराध बनता जा रहा है..... एसिड अटैक न सिर्फ किसी महिला के चेहरे को खराब कर देता है..ना सिर्फ उसकी आँखों की रोशनी छीन लेता है... बल्कि समाज में उसे तिल-तिल कर मरने के लिए भी मजबूर कर देता है... हो सकता है इस तेज़ाबी हमले में उसकी जान न जाए, पर इस हमले की शिकार हुई लड़की की ज़िंदगी बेहद बोझिल और दर्दनाक होकर रह जाती है

जिस्म पर लगे घाव तो सबको दिखते हैं लेकिन ज़हन पर लगे घाव किसी को नज़र नहीं आते.... आत्मनिर्भर और ज़िंदादिली से भरपूर एक लड़की... देखते ही देखते असहाय और दूसरों पर आश्रित होकर रह जाती है.... महिलाओं में सुंदर चेहरों को खासी तवज्जो दी जाती है.... ऐसे में तेजाब से झुलसे डरावने चेहरे से समझौता कर पाना...किसी भी लड़की के लिए आसान नहीं होता
हालांकि एसिड अटैक पर कोई आधिकारिक आँकड़ें तो नहीं हैं... लेकिन देश में पिछले 10 सालों में...देशभर में ये अपराध खूब बढ़ा...  स्वयंसेवी संस्था एसिड सरवाइवल ट्रस्ट इंटरनेशनल यानी  ASTI  के मुताबिक... भारत में हर साल एसिड अटैक के करीब 500 मामले होते हैं
तेज़ाब से हमलों का शिकार हुई महिलाओं का मानना है कि तेज़ाब से हुआ हमला...ना सिर्फ उनके जिस्म बल्कि ज़हन को भी अंदर तक छलनी कर जाता है.
ASTI के रिकॉर्ड मुताबिक दुनिया के करीब 23 देशों में एसिड अटैक का खौफ पसरा है... इन देशों में अमरीका, ब्रिटेन, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों के भी नाम हैं लेकिन इन देशों में दूसरी जगहों की अपेक्षा हमलों की संख्या बेहद कम है... महिलाओं पर एसिड हमलों की सबसे ज्यादा घटनाएँ भारत, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश के अलावा कंबोडिया में दर्ज की गई हैं.
विशेषज्ञ भी इस बात को मानते हैं इस जुर्म के पीछे...लचर कानून व्यवस्था ही सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। आमतौर पर इन हमलों की शिकार महिलाएं होती हैं। कभी घरेलू हिंसा तो कभी टूटा प्रेम संबंध जैसे मामलों में...गाज आखिरकार महिला पर आकर गिरती है..... कई मामलों में तो ये भी देखा गया है कि...लड़कियों पर एसिड अटैक के बाद... दोषी ज़मानत पर रिहा हो जाते हैं और उनकी ज़िंदगी आगे बढ़ जाती है.... जबकि पीड़ित की ज़िंदगी वहीं की वहीं थम कर रह जाती हैलेकिन विडंबना देखिए.....कि देश में आज भी एसिड अटैक के मामले..... सुर्खियों से दूर और सरकारी निगाहों से परे... कहीं किसी कोने में भटकते रहते हैं.


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