Monday, 29 February 2016

बदलाव का रहा बजट

आम बजट पर पहले ही देश की निगाहें लगी हुई थीं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह कहकर उत्सुकता और बढ़ा दी थी कि यह बजट उनके लिए एक परीक्षा है। वह बजट रूपी परीक्षा में पास हुए, इसकी पुष्टि विपक्षी दलों की टिप्पणियां भी कर रही हैं। विपक्षी दलों के नेता हमेशा की तरह बजट की आलोचना तो कर रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि उसमें कोई सार नहीं है। वे बजट के इस या उस पहलू की आधी-अधूरी आलोचना ही कर पा रहे हैं। इसका कारण यही है कि दूरगामी सोच का परिचय देते हुए ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था में बुनियादी बदलाव लाने के ठोस और व्यापक उपाय किए गए हैं। ये ऐसे उपाय हैं जो अर्थव्यवस्था को समग्र रूप में मजबूती देने में सहायक होंगे। बजट सीधे तौर पर यही संदेश दे रहा है कि भारत सरीखे देश की अर्थव्यवस्था के आधार तभी मजबूत हो सकते हैं जब देश की विशाल आबादी जिस कृषि पर निर्भर है उस पर आधारित आर्थिक तंत्र अपने पैरों पर खड़ा हो सके। पांच साल के अंदर किसानों की आय दोगुना करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए यह आवश्यक था कि खेती को फायदे का सौदा बनाने के फौरी उपाय भी किए जाएं और दीर्घकालिक भी। खेती-किसानी के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था के रूपांतरण के बीज बोने का जो काम बजट के माध्यम से किया गया है वह सरकार की राजनीतिक बुनियाद भी मजबूत करेगा और सामाजिक बुनियाद भी। जिस तरह यह आवश्यक ही नहीं अनिवार्य हो गया था कि सबसे पहले संकट ग्रस्त कृषि की सुधि ली जाए उसी तरह यह भी कि कर सुधारों की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं और साथ ही बैंकों की वित्तीय स्थिति पर भी ध्यान दिया जाए। इन अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए जो भी उपाय बजट में किए गए हैं उन पर सही तरह अमल भी जरूरी है और यह भी कि सरकार की रीति-नीति को लेकर कहीं कोई अस्पष्टता न रहे। प्रत्यक्ष कर विवाद निस्तारण योजना की घोषणा यह बताती है कि सरकार देर से ही सही, निवेशकों की चिंता को दूर करने के मामले में किसी संदेह की गुंजाइश नहीं रखना चाहती।1 ग्रामीण अर्थव्यवस्था के कायाकल्प की कोई कारगर रूपरेखा पेश करने के साथ ही यह भी आवश्यक था कि सरकार बुनियादी ढांचे पर विशेष बल दे। बुनियादी ढांचे के विकास पर भारी-भरकम खर्च समय की मांग थी। बुनियादी ढांचे के लिए आवंटित सवा दो लाख करोड़ रुपये में से केवल सड़कों के लिए 97 हजार करोड़ का आवंटन एक तरह से संबंधित मंत्रलय को उसके बेहतर प्रदर्शन के लिए दिया गया इनाम भी है। बुनियादी ढांचे के विकास के उपाय अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में सहायक बनने ही चाहिए। आम बजट में जो अन्य उल्लेखनीय बुनियादी उपाय हैं और जिनकी अनदेखी नहीं की जा सकतीं उनमें शिक्षा और स्वास्थ्य ढांचे के सुधार के कदम हैं। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के कदम उठाने के साथ सरकार को युवाओं के रोजगार की चिंता करनी ही थी। उसे यह चिंता आगे भी करते रहनी होगी ठीक वैसे ही जैसे उसने आम लोगों की सेहत के मामले में की। सब्सिडी का इससे बेहतर इस्तेमाल और कोई नहीं हो सकता कि वह लोगों की सेहत की रक्षा करने में भी सहायक बने और पर्यावरण को भी बचाए। दरअसल ऐसे ही कई कदमों के कारण यह बजट बुनियादी बदलाव लाने वाला दस्तावेज है। यह जरूरी है कि इस दस्तावेज पर अमल के लिए कोई कोर-कसर न उठा रखी जाए।

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